न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१६ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ गुण-
दर्थः भवति हि गुणत्वं द्रव्यत्वव्यापकतावच्छेदकं तद्वत्ता च
गुणानामिति ।
भाषा-( द्रव्याश्रिता इति ) यद्यपि मूलोक्त 'द्रव्याश्रितत्व' इतनामात्र लक्षण
नहीं बनसकता क्योंकि द्रव्याश्रयता गुणोंकी तरह कर्मोंमेंभी है, एवं गुणोंका लक्षण
कर्मोंमें अतिव्याप्त होगा; तथापि द्रव्यत्वनिरूपित जो गुणोंनिष्ठ व्यापकता तादृश
व्यापकताकी अवच्छेदक जो सत्तासे भिन्न 'गुणत्व' रूपा जाति तादृश जातिमत्त्व
गुणोंमें सिद्ध है यही 'द्रव्याश्रिता' इत्यादि मूलका अर्थ है. द्रव्यत्वनिरूपित
व्यापकताका अवच्छेदक गुणत्वरूप धर्म होसकताहै और तादृश गुणत्वरूप धर्मवत्ता
गुणोंमेंभी आसकतीहै.
कर्मत्वं द्रव्यत्वं वा न द्रव्यत्वव्यापकतावच्छेदकं गगनादौ द्रव्य-
कर्मणोरभावात् । द्रव्यत्वत्वं सामान्यत्वादिकं च न जातिरिति
तद्व्युदासः ।
भाषा-द्रव्यत्व या कर्मत्वरूप धर्म द्रव्यत्वनिरूपित व्यापकताके अवच्छेदक
नहीं होसकते; क्योंकि यदि हरएक द्रव्यमें द्रव्य रहे या कर्म रहे तो द्रव्यत्वनिरू-
पित व्यापकता उस द्रव्य या कर्ममें आवे तो उनमें रहनेवाले द्रव्यत्व या कर्मत्वरूप
धर्मभी उस व्यापकताके अवच्छेदक बने परन्तु यह वार्ता तो है नहीं; क्योंकि
आकाशादि पांचमें कोई द्रव्यान्तर समवायसम्बन्धसे नहीं रहता, एवं आकाशादि
चारमें कर्मभी नहीं रहता इसलिये द्रव्यत्व या कर्मत्वरूप धर्म द्रव्यत्वनिरूपित
व्यापकताके अवच्छेदक नहीं होसकते; द्रव्यत्वमें रहनेवाला द्रव्यत्वत्वरूप धर्म
और सामान्यमें रहनेवाला सामान्यत्वरूप धर्म जातिरूप नहींहै किन्तु उपाधिरूप है;
इसलिये लक्षणमें 'जाति' पदके निवेशसे इन दोनोंका वारण समझना चाहिये.
निर्गुणा इति । यद्यपि निर्गुणत्वं कर्मादावपि । तथापि सामान्य-
वत्त्वे सति कर्मान्यत्वे च सति निर्गुणत्वं बोध्यम्।जात्यादीनां न
सामान्यवत्त्वं,कर्मणो न कर्मान्यत्वं, द्रव्यस्य न निर्गुणत्वमिति
तत्र नातिव्याप्तिः ।
भाषा-( निर्गुणा इति ) यद्यपि गुणशून्यता कर्मादिकोंमेंभी है, इसलिये गुणल-
क्षणकी कर्मादिमें अतिव्याप्ति होगी तथापि सामान्यवाला हो और कर्मसे भिन्न
होकर जो निर्गुण हो वह गुण जानना चाहिये, सामान्यविशेषादि सामान्यवाले नहीं