न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९६ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ शब्द-
गोस्वामिनि लक्षणा गवि चित्राभेदान्वयः । यदि त्वेकदेशान्वयो
न स्वीक्रियते तदा गोपदस्य चित्रगोस्वामिनि लक्षणा चित्रपदं
तात्पर्यग्राहकम् ।
भाषा-परन्तु यदि यहां एकदेशान्वय न स्वीकार होय तो “ गम्भीरायां नद्यां
घोषः” इत्यादि स्थलमें 'नदी' पदकी गम्भीरनदीतीरमें लक्षणा करनी और 'गम्भीर'
पदको “ नदीपदं गम्भीरनदीतीरविषयकबोधजनकं भवतु ” इत्याकारक वक्ताकी
इच्छारूप जो तात्पर्य तादृश तात्पर्यका ग्राहक है. ऐसेही बहुव्रीहिसमासस्थलमेंभी
वाक्यके अवयवहीमें लक्षणा माननी उचित है. “ चित्रा गावो यस्यासौ चित्रगुः ”
इत्यादि बहुव्रीहिस्थलमें यदि एकदेशान्वय स्वीकृत होय तो 'गो'पदकी गैयोंके स्वामीमें
लक्षणा करनी और 'चित्रा'पदार्थका गोपदार्थके साथ अभेदान्वय करना परन्तु यदि
एकदेशान्वय न अभिमत होय तो गोपदकी चित्रगैयोंके स्वामीमें लक्षणा करनी और
‘ चित्र ’ पदको पूर्वोक्त रीतिसे वक्तृतात्पर्यका ग्राहक समझना.
एवमारूढवानरो वृक्ष इत्यत्र वानरपदस्य वानरावेशकर्मणि लक्ष-
णा, आरूढपदं च तात्पर्यग्राहकम् । एवमन्यत्रापि ।
भाषा-ऐसेही “ आरूढो वानरोऽयमसौ आरूढवानरो वृक्षः ” इत्यादि स्थलमें
'वानर' पदकी वानरके आरोहणरूप कर्ममें लक्षणा करनी और पूर्वोक्तरीतिसे 'आरूढ'
पद वक्तृतात्पर्यका ग्राहक समझना यही क्रम और और प्रयोग स्थलोंमेंभी जानलेना.
तत्पुरुषे तु पूर्वपदे लक्षणा । तथाहि । राजपुरुषादिपदे राज-
पदार्थेन पुरुषादिपदार्थस्य साक्षान्नान्वयो निपातातिरिक्तनामार्थ-
योर्भेदेनान्वयबोधस्याव्युत्पन्नत्वात्, अन्यथा राजा पुरुष इत्य-
त्रापि तथाऽन्वयबोधः स्यात् ।
भाषा-एवं तत्पुरुष समासस्थलमें पूर्वपदमें लक्षणा होतीहै अर्थात् पूर्वपद लाक्षणिक
होताहै. (तथाहि) जैसे “ राज्ञः पुरुषः राजपुरुषः ” इत्यादि षष्ठीतत्पुरुष समासस्थलमें
राजपदार्थके साथ पुरुषपदार्थका साक्षात् सम्बन्धसे अन्वय नहीं है;क्योंकि अव्ययनि-
पातातिरिक्त नामार्थ नामार्थोंका भेद सम्बन्धसे अन्वय बोध (अव्युत्पन्न) असिद्ध है;
( अन्यथा ) यदि अव्ययनिपातातिरिक्त नामार्थ नामार्थोंकाभी भेद सम्बन्धसे अन्वय-
बोध मानलिया जाय तो “ राजा पुरुषः ” इत्यादि स्थलोंमेंभी भेदसम्बन्धसे अन्व-
यबोध होना चाहिये.