न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेदः ४ ] भाषाटीकासमेता. १८९
किंच गौः शक्येति शक्तिग्रहो यदि तदा व्यक्तौ शक्तिः, यदि तु
गोत्वं शक्यमिति शक्तिग्रहः तदा गोत्वप्रकारकपदार्थस्मरणं शा-
ब्दबोधश्च न स्यात्, समानप्रकारकत्वेन शक्तिज्ञानस्य पदार्थ-
स्मरणं शाब्दबोधं प्रति च हेतुत्वात् ।
भाषा-( किञ्च ) यदि “गौः गोपदशक्यः” इत्याकारक शक्तिज्ञान हुआ है
तो व्यक्तिहीमें शक्ति अनुभवसिद्ध है और यह विशिष्टज्ञान प्रमात्मकभी होसकताहै
क्योंकि आपके सिद्धान्तमें अन्यथा ख्यातिका अस्वीकार है और यदि “गोत्वं गोपा-
दशक्यम्” इत्याकारक शक्तिज्ञान हुआहै तो गोपदसे गोत्वप्रकारक पदार्थका अर्थात्
गोव्यक्तिका स्मरण तथा गोत्वप्रकारक गोविशेष्यक शाब्दबोधका उदय नहीं होना
चाहिये; क्योंकि यह नियमहै कि-यत्प्रकारक यद्विशेष्यक शब्दशक्तिका ग्रहण हुआहै
वह शब्दशक्तिग्रह तत्प्रकारक पदार्थस्मरणके प्रति तथा तत्प्रकारक तद्विशेष्यक
शाब्दबोधके प्रति कारण होताहै.
किंच गोत्वे यदि शक्तिस्तदा गोत्वत्वं शक्यतावच्छेदकं वाच्यम्,
गोत्वत्वं तु गवेतरासमवेतत्वे सति सकलगोसमवेतत्वं तथा च
गोव्यक्तीनां शक्यतावच्छेदकेऽनुप्रवेशात्तत्रैव गौरवम् ।
भाषा-( किञ्च ) यदि गोपदकी ( गोत्व ) जातिहीमें शक्ति मान लीजाय तो
शक्यतावच्छेदक धर्म गोत्वके सिरपर गोत्वत्वही कहना होगा. फिर वह गोत्वत्वंभी
‘किमाकारक’ है? ऐसी जिज्ञासावाले पुरुषको “गवेतरासमवेतत्वे सति सकलगोस-
मवेतत्वं--अर्थात् गोव्यक्तिसे इतर व्यक्तियोंमें असमवेत होना और केवल गोव्यक्तिमात्र
में समवेत होनाही गोत्वमें गोत्वत्व है” यही उत्तर कहना होगा.(तथाच) इस कथनसे
गोव्यक्तियोंकाभी शक्यतावच्छेदक कोटिमें प्रवेश होनेसे तथा शाब्दबोधकी कारणतावच्छे-
दककोटिमें प्रवेश होनेसे आपहीको गौरव होगा.
तस्मात्तत्तज्जात्याकृतिविशिष्टतत्तद्व्यक्तिबोधानुपपत्त्या कल्प्य-
माना शक्तिर्जात्याकृतिविशिष्टव्यक्तौ विश्राम्यतीति ।
भाषा-(तस्मात्) इसलिये केवल जातिमें या (आकृति) अवयवसंस्थानमें या
व्यक्तिमात्रमें शक्ति माननेसे (तत्तत्) उस २ गोत्वादिजाति तथा (तत्तत्)
उस २ शृङ्गशासनादि अवयवसंस्थानविशिष्ट (तत्तत्) उस २ गोआदि व्यक्तियोंके
बोधकी अनुपपत्ति होनेसे बुद्धिपूर्वक शक्तिकी कल्पना जात्याकृतिविशिष्ट व्यक्तिमें
विश्रान्त होतीहै-इति ।