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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 170

१४६ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ अनुमान-
भावका अनधिकरणहेत्वधिकरण आत्मा है; एवं अव्याप्ति हुई. तात्पर्य यह कि-कपि-
संयोगको सामान्यगुण अन्तःपाति होनेसे कपिसंयोगाभावमें कपिसंयोगाभावत्व और
गुणसामान्याभावत्व ये दो धर्म रहतेहैं. हम यत्किञ्चित् प्रतियोगितावच्छेदक धर्मसे
गुणसामान्याभावत्वरूप धर्महीका ग्रहण करेंगे तदवच्छिन्नगुणसामान्याभावका अन-
धिकरण हेत्वधिकरण आत्मा होगा. भाव यह कि-यद्यपि कपिसंयोगाभावत्वेन कपि-
संयोगाभावाभाव हेत्वधिकरण आत्मामें नहीं पासकते तथापि गुणसामान्याभावत्वेन
कपिसंयोगाभावाभाव पासकतेहैं. इस रीतिसे गुणसामान्याभावत्वेन कपिसंयोगाभाव-
का अनधिकरण हेत्वधिकरण आत्मा हुआ अर्थात् यत्किञ्चित् धर्म पुरस्कारेण गृहीत
जो साध्य उसका अभाव हेत्वधिकरणमें पानेसे अव्याप्तिरूप दोष हुआ.
मैवम् । यादृशप्रतियोगितावच्छेदकावच्छिन्नानधिकरणत्वं हेतु
मतस्तादृशप्रतियोगितानवच्छेदकत्वस्य विवक्षितत्वात् । १४ ।
समाधान-यादृशीप्रतियोगिताके अवच्छेदकावच्छिन्नका अनधिकरण हेत्वधिकरण
होय तादृशी प्रतियोगिताका अनवच्छेदक साध्यतावच्छेदक धर्म विवक्षित है. प्रकृतमें
'कपिसंयोगाभाववान् आत्मत्वात्' यहां 'यादृशी प्रतियोगिता' शब्दसे गुणसा-
मान्याभावत्वावच्छिन्न गुणसामान्याभावनिष्ठ प्रतियोगिताहीका ग्रहण करना योग्य
है. एवं गुणसामान्याभावनिष्ठ प्रतियोगिताका अनवच्छेदक साध्यतावच्छेदक धर्म
कपिसंयोगाभावत्व होसकता है. इसलिये अव्याप्ति नहीं है. एवं यहां लक्षणका स्वरूप
ऐसा हुआ कि-( साध्यतावच्छेदकसम्बन्धावच्छिन्न यादृश प्रतियोगितावच्छेदका-
वच्छिन्न प्रतियोग्यनधिकरणं यत् हेतुतावच्छेदकसम्बन्धावच्छिन्नहेतुतावच्छेदकावच्छि-
न्नहेत्वधिकरणं तद्वृत्त्यभावीयतादृशप्रतियोगितानवच्छेदकं यत् साध्यतावच्छेदकं
तदवच्छिन्नसाध्यसामानाधिकरण्यं व्याप्तिः-इति ) इस लक्षणका प्रकृतमें संगत
करनेका प्रकार यह है कि, साध्यतावच्छेदकीभूतस्वरूप सम्बन्धावच्छिन्ना गुणसा-
मान्याभावाभावीया जो गुणसामान्याभावत्वावच्छिन्नागुणसामान्याभावनिष्ठा प्रतियोगिता
उस प्रतियोगिताकावच्छेदकीभूत जो गुणसामान्याभावत्वरूप धर्म तदवच्छिन्न जो गुण
सामान्याभाव उस गुणसामान्याभावका अनधिकरण जो हेतुतावच्छेदकीभूत समवायस-
म्बन्धावच्छिन्न आत्मत्वत्वावच्छिन्न आत्मत्वाधिकरणं आत्मा उसमें रहनेवाले अभावसे
निरूपित जो गुणसामान्याभावत्वावच्छिन्न गुणसामान्याभावनिष्ठ प्रतियोगिता तादृश
प्रतियोगिताका अनवच्छेदक जो साध्यतावच्छेदक धर्म कपिसंयोगाभावत्व तदवच्छिन्न
कपिसंयोगाभावके साथ आत्मत्वरूप हेतुका आत्मरूपएकाधिकरणमें सामानाधिकरण्य
है. एवं लक्षण संगत हुआ १४।