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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 350 में से

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पृष्ठ 167

धिकरण हेत्वधिकरण एत वृक्ष होसकता है, एवं अभावीय प्रतियोगितावच्छेदक
घटत्वादि धर्म होंगे, अनवच्छेदक साध्यतावच्छेदक कपिसंयोगत्व धर्म्म होगा,
ऐसे अव्याप्तिरूप दोष नहीं है.
द्वितीये तु प्रतियोगिव्यधिकरणाभावाप्रसिद्धिः । सर्वस्यैवाभा-
वस्यपूर्वक्षणवृत्ति त्वविशिष्टस्वाभावात्मकप्रतियोगिसामाना-
धिकरणत्वात् ।
भाषा-तथापि द्वितीयपक्षमें कहे प्रतियोगितावच्छेदकावच्छिन्न यावत् प्रतियोगिके
अनधिकरणकी विवक्षा करनेसे “वह्निमान् धूमात्” इत्यादि सद्धेतुमात्रमें लक्षणका अस-
म्भव है क्योंकि यहां पूर्वोक्त रीतिसे लक्षणघटक घटाद्यभाव होसकता है; परन्तु वहभी
प्रतियोगितावच्छेदकावच्छिन्न यावत् प्रतियोगिके अनधिकरणमें नहीं रहसकता किन्तु
स्वाभावात्मक प्रतियोगिके समानाधिकरणहीमें रहताहै. तात्पर्य यह कि-हेत्वधिक-
रण पर्वतमें घटाभाव और पूर्वक्षणवृत्तित्वविशिष्ट घटाभावाभावाभाव ये दोनों एक
रूप हैं, उस एकरूपापन्न अभावके प्रतियोगि दो हुए; एक घट और दूसरा घटाभा-
वाभाव. वह यद्यपि घटात्मक प्रतियोगिके साथ समानाधिकरण नहीं है तथापि
स्वाभावात्मक प्रतियोगिके साथ एकाधिकरणवृत्ति है. यहां यह भाव है कि- जिस
अधिकरणमें घटाभाव रहेगा उसी अधिकरणमें घटाभावका अभाव नहीं रहसकता;
क्योंकि “अभावविरहात्मत्वं वस्तुनः प्रतियोगिता” इस आचार्यके वचनानुरोधसे
घटाभावका अभाव घटस्वरूप होताहै, एवं प्रतियोगि तथा उसका अभाव दोनों एका-
धिकरणमें नहीं रहसकते. इसलिये घटाभावमें ‘ पूर्वक्षणवृत्तित्वविशिष्ट ’ यह विशेषण
दिया. एवं घटाभावके अधिकरणमें यद्यपि घट नहीं रहता तथापि पूर्वक्षणवृत्तित्ववि-
शिष्ट घटाभावका अभाव उत्तरक्षणावच्छेदेन रहसकताहै.एवं पूर्वक्षणवृत्तित्वविशिष्ट
घटाभावके अभावका अभाव पूर्वक्षणवृत्तित्वविशिष्ट घटाभावस्वरूप होगा और
विशिष्टवस्तुका शुद्धसे भेद नहीं होता. इस न्यायसे विशिष्टघटाभाव शुद्धघटाभाव
स्वरूप हुआ; उस अभावके प्रतियोगि घट तथा स्वाभाव ये दो हुए. एवं यद्यपि
उसको घटात्मक प्रतियोगिके साथ समानाधिकरण नहीं है, तथापि प्रतियोगिता-
वच्छेदकावच्छिन्न यावत् प्रतियोगिअन्तर्गत स्वाभावात्मक प्रतियोगिके साथ घटाभा-
वादिका समानाधिकरण होसकताहै. एवं रीतिसे प्रतियोगिव्यधिकरणाभावकी अप्र-
सिद्धी है.
न च वह्निमान् धूमादित्यादौ घटाभावादेः पूर्वक्षणवृत्तित्वविशि-
ष्टस्वाभावात्मकंप्रतियोग्यधिकरणत्वं यद्यपि पर्वतादेस्तथापि