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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 350 में से

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द्वैतवादी होनेसे अवैदिक तथा कणाद गौतमको परमाणुवादी होनेसे वैनाशिक लिखही
दिया है. गुरुका कहा सभी चेला लोग मानेहींगे फिर पृथक् व्यवस्था करनेका कौन
प्रयोजन रहा? कपिल, कणाद, गौतम, पतंजलि, तथा जैमिनि, ये पांचों दर्शनकार
तो नानात्मवादी होनेसे अवैदिकही हैं. शेष रहे व्यासदेव सो इन्होंकाभी योगसूत्रोंके
भाष्यमें तो नाना चिदात्मवादही सिद्धान्त है इनकोभी चाहे आप वैदिक मानें या अवै-
दिक. हां, इनके ब्रह्मसूत्रोंमें स्पष्टरूपसे चाहो कहींभी नहींमिलता परन्तु भगवत्पाद
निर्मित उनके भाष्यमें एकात्मवाद अतिसमारोहसे निरूपण किया है.
अब हमको यहां सन्देह उत्पन्न होता है कि कपिलादि षट्महर्षि अवैदिक हैं या एक
भगवत्पाद श्री १०८ शंकर स्वामीही अवैदिकहैं ? परस्पर विरुद्ध लेख है; इसलिये
दोनोंमें एक कोटि अवश्य निर्बल होनी चाहिये. ‘कौन होनी चाहिये?’ इसको विद्वान्
लोग स्वयं सोचें. मेरी अल्पबुद्धि इसपर सिद्धान्त नहीं करसकती और न मैं श्रद्धा-
शून्य होकर किसी अपने पूज्य पूर्वज वृद्धको न्यूनकोटीका कहनाही चाहताह