न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
पृष्ठ 139, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेदः १ ] भाषाटीकासमेता. ११५
भाषा-(परन्तु) यहां (समानानां) तुल्यपदार्थोंका (भावः) प्रकारीभूतधर्म
'सामान्य' शब्दका अर्थ है. वह किसी जगहमें नित्य है, जैसे धूमत्व घटत्व पटत्वादि;
और किसी जगहमें अनित्यभी है, जैसे घटपटादि. जिस स्थलमें एकही घटका संयोग
सम्बन्धसे भूतलमें और समवायसम्बन्धसे कपालोंमें भान हुआहै वहां (तदनन्तरं)
उस लौकिकज्ञानके पश्चात् द्वितीयक्षणमें 'सर्वाणि भूतलादीनि संयोगेन घटवंति'
एवं सर्वे कपालाः समवायेन घटवन्तः' इत्याकारक यावत् उस घटवाले संयोगसम्ब-
न्धसे भूतलादिकोंका तथा समवायसम्बन्धसे कपालोंका ज्ञान होता है. (तत्रेदं बो-
ध्यम्) वहां ऐसे स्थलमें ज्ञायमान अनित्य सामान्यही प्रत्यासत्ति जाननी उचित है;
(परन्तु) उसमेंभी इतना और अधिक जानना चाहिये कि वह सामान्य जिस स-
म्बन्धसे अपने अधिकरणमें ज्ञात हुआ है उसीही सम्बन्धसे उस सदृश
अधिकरणोंकी अलौकिक प्रत्यासत्ति होती है. अन्यथा यदि ऐसा नहीं
माने तो समवायसम्बन्धसे ज्ञान प्रकारीभूत घटत्वादि सामान्य प्रत्यासत्तिसे
कालाकाशादि पदार्थोंके ज्ञानकी आपत्तिभी अलौकिक प्रत्यासत्तिसे होसकती है.
किंतु यत्र तद्घटनाशानन्तरं तद्धटवतः स्मरणं जातं तत्र सामा-
न्यलक्षणया सर्वेषां तद्धटवतां भानं न स्यात्, सामान्यस्य त-
दानीमभावात् । किंचेन्द्रियसम्बद्धविशेष्यकं 'घटः' इति ज्ञानं
यत्र जातं तत्र परदिन इन्द्रियसम्बन्धंविनापि तादृशज्ञानप्रकारी-
भूतसामान्यस्य सत्त्वात्तादृशज्ञानं कुतो न जायते ।
भाषा-किन्तु एवंच जिस स्थलमें (तद्घट) विशेषणरूपेण दृष्ट घटके नाशके
अनन्तर उसी घटवाले स्थलका "तद्भूतलं घटवदासीत्"इत्याकारक स्मरण हुआ है
वहां सामान्यलक्षणा प्रत्यासत्तिसे उसी सम्बन्धसे उस घटवाले यावत् अधिकरणोंका
बोध नहीं हुआ चाहिये; क्योंकि सामान्यरूपसे भासमान घटका उस कालमें अभाव
है. और वही अधिकरणोंके साथ ज्ञानका सम्बन्ध है; उसके न होनेसे उसके अधिकर-
णोंका ज्ञानभी स्वयंही नहीं होगा. (किञ्च) औरभी दोष है. जहां इन्द्रियसम्बद्ध
विशेष्यक 'घटः' इत्याकारक ज्ञान उत्पन्न हुआ है वहां अग्रिम दिनमें इन्द्रियसम्ब-
न्धसे विनाभी तादृश 'घटः' इत्याकारक ज्ञान प्रकारीभूत घटत्वरूप सामान्य विद्य-
मान है तादृश सामान्यलक्षणा प्रत्यसत्तिद्वारा "सर्वे घटा घटत्ववतः"इत्याकारक ज्ञान-
अग्रिम दिनमें क्यों नहीं होता?(अर्थात् ज्ञानकी सामग्री विद्यमान है तो ज्ञान अवश्य
होनाचाहिये )