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न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 350 में से

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पृष्ठ 129

परिच्छेदः १ ] भाषाटीकासमेता. १०५
द्रव्यसमवेतसमवेतचाक्षुषंप्रति चक्षुःसंयुक्तसमवेतसमवायः ।
एवमन्यत्रापि विशिष्यैव कार्यकारणभावः ।
भाषा-घटादि द्रव्यका लौकिक प्रत्यक्ष नेत्रादि इन्द्रियोंके संयोगसे होता है.
एवं घटादि द्रव्य समवेत रूपादिकोंका लौकिक प्रत्यक्ष ' इन्द्रियसंयुक्त समवाय '
सम्बन्धसे होता है.ऐसेही आगेभी जानलेना.वास्तवस तो ऐसा कहना उचित है कि-
घटादि द्रव्य चाक्षुषके प्रति चक्षुःसंयोगकी कारणताहै. एवं घटादिसमवेतरूपादि चाक्षुष
प्रत्यक्षके प्रति ' चक्षुःसंयुक्तसमवाय संसर्गकोकारणता है. एवं घटादि द्रव्यमें समवेत
जो रूपादि उनमें समवेत जो रूपत्त्वादि उन रूपत्त्वादि चाक्षुष प्रत्यक्षके प्रति 'चक्षुः-
संयुक्तसमवेत समवाय' संसर्गको कारणता है ऐसेही त्वाचादिलौकिक प्रत्यक्षमेंभी
विशेषरूपसेही कार्यकारण भाव मानना उचित है.
परंतु परमाणुनीले नीलत्वं पृथिवीपरमाणौ पृथिवीत्वं च चक्षु-
षा कथं न गृह्यते,तत्र परम्परयोद्भूतरूपसम्बन्धस्य महत्त्वसम्ब-
न्धस्य च विद्यमानत्वात् ।
भाषा-(परंतु) इसमेंभी यह विचारणीय है कि पृथिवीके नील परमाणुओंमें नीलत्व
जातिका तथा पार्थिवपरमाणुओंमें पृथिवीत्वजातिका नेत्र इन्द्रिय द्वारा ग्रहण क्यों नहीं
होसकता ? वहां 'स्वाश्रयसमवेतसमवेतत्वादि' परम्परा सम्बन्धसे उद्भूतरूप तथा
महत्त्व परिमाणरूप कारणभी विद्यमान है. यहां 'स्व' शब्दसे उद्भूत रूप तथा महत्त्व-
परिमाण उभयका ग्रहण है. उनके आश्रय त्रसरेणु आदिहैं; त्रसरेणु द्वयणुकमें समवेत है
द्वयणुकपरमाणुओंमें समवेत है, इत्याकारक परंपरासम्बन्धसे उद्भूतरूप तथा महत्त्व
परिमाण परमाणुओंमें विद्यमान है इसीको स्पष्टरूपसे दिखलाते हैं-
तथाहि। नीलत्वं जातिरेकैव घटनीले परमाणुनीले च वर्त्ततेत-
था च महत्त्वसम्बन्धो घटनीलमादायवर्त्तते उद्भूतरूपसम्बन्ध-
स्तूभयमादायैव वर्तते । एवं पृथिवीत्वे घटादिकमादाय मह-
त्त्वसम्बन्धो बोध्यः। एवं वायौ तदीयस्पर्शादौ च सत्तायाश्चाक्षु-
षप्रत्यक्षं स्यात् ।
भाषा-तथाहि नीलमें नीलत्वजाति एकही है वहीघट नीलमें तथा परमाणु नीलमें
विद्यमान है. एवं महत्त्व परिमाणका सम्बन्ध घट नीलको लेकर परमाणुनीलमें विद्य-
मान है और उद्भूतरूपका सम्बन्ध तो घटनील तथा परमाणु नील उभयको लेकर