न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०० न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ प्रत्यक्ष-
ज्ञानं यन्निर्विकल्पाख्यं तदतीन्द्रियमिष्यते ।
भाषा-और जो निर्विकल्पात्मक ज्ञान है उसका किसी इन्द्रियद्वारा प्रत्यक्ष
नहीं होता.
ज्ञानं यदिति। चक्षुःसंयोगाद्यनन्तरं घट इत्याकारकं घटत्वादिवि-
शिष्टज्ञानं न सम्भवति पूर्वं विशेषणस्य घटत्वादेर्ज्ञानाभावात्,
विशिष्टबुद्धौ विशेषणज्ञानस्य कारणत्वात् । तथा च प्रथमतौ
घटघटत्वयोर्वैशिष्ट्यानवगाहि एव ज्ञानं जायते तदेव निर्विक-
ल्पकात्मकम् । तच्च न प्रत्यक्षम् ।
भाषा--उसमें प्रमाण यह है कि-नेत्रइन्द्रियके संयोगआदिके पश्चात् ही 'अयं
घटः' इत्याकारक घटत्वादि प्रकारक घटादिविशेष्यक विशिष्ट ज्ञान नहीं होता;
क्योंकि उससे पहले विशेषणीभूत घटत्वादिका ज्ञान नहीं है. और 'अयंघटः'
इत्याकारक विशिष्टबुद्धिमें ' घटत्वादि ' विशेषणज्ञानको कारणताका नियम है;
इसलिये पहले घटघटत्वादि उभयका ( वैशिष्ट्यानवगाहि ) जुदा जुदा "इमे घट-
घटत्वे" इत्याकारक ज्ञान ही होता है उसीका नाम निर्विकल्प ज्ञान है. वह निर्विकल्पकें
ज्ञान प्रत्यक्ष नहीं होता ।
तथाहि । वैशिष्ट्यानवगाहिज्ञानस्य प्रत्यक्षं न भवति घटमहं
जानामीति प्रत्ययात् । तत्रात्मनि ज्ञानं प्रकारीभूय भासते,ज्ञाने
घटस्तत्र घटत्वम् । यः प्रकारः स एव विशेषणमित्युच्यते ।
विशेषणे यद्विशेषणं तद्विशेषणतावच्छेदकमित्युच्यते । विशे-
षणतावच्छेदकप्रकारकं ज्ञानं विशिष्टवैशिष्ट्यज्ञाने कारणम् ।
भाषा-वह इसरीतिसे है कि (वैशिष्ट्यानवगाहि) 'विशेष्यता' प्रकारता, संसर्गता
को न विषय करनेवाले ज्ञानका प्रत्यक्ष नहीं होता क्योंकि ज्ञानका प्रत्यक्ष तो
“घटमहं जानामि” इत्याकारक अनुव्यवसायात्मक प्रतीतिमें होता है. इसप्रती-
तिमें आत्मामें ज्ञान विशेषणरूपसे प्रतीत होता है और ज्ञानमें घट विशेषणरूपसे
भासता है. एवं घटमें घटत्वविशेषण रूपसे भासता है. प्रकार और विशेषण ये एक
अर्थको कहनेवाले दो शब्द हैं. घटादिविशेषणोंमें जो घटत्वादि विशेषण है उन्हींको
विशेषणताके अवच्छेदक धर्मभी कहते हैं. उन घटत्वादिधर्मोंका जो विशेषणतावच्छे-
दक प्रकारकरूपसे ज्ञान वही 'घटमहं जानामि' इत्याकारक विशिष्ट वैशिष्ट्यावगाहि
ज्ञानमें कारण है.