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सर्वकोश
न्यायबिन्दु (आचार्य धर्मकीर्ति - धर्मोत्तर टीका एवं पं. चन्द्रशेखर शास्त्री सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

न्यायबिन्दु (आचार्य धर्मकीर्ति - धर्मोत्तर टीका एवं पं. चन्द्रशेखर शास्त्री सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Nyayabindu of Dharmakirti with Dharmottara Tika

आचार्य धर्मकीर्ति (टीकाकार: धर्मोत्तरोपाध्याय / चन्द्रशेखर शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished176 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 176 में से

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पृष्ठ 161

न्यायबिन्दु १७
जो स्वयं वादीसे माना गया हो [ पक्ष वही होगा ] ( जो वादके समयमें साधनको
कहे उसे वादी कहते हैं ) इससे यद्यपि वादी किसी शास्त्रमें स्थिर रहकर साधनको
कहता है [ तथापि ] उस शास्त्रकारके उस धर्मीमें माने हुए अनेक धर्मीमें से भी वादी
जिस धर्मको साधना चाहे वही साध्य होता है, अन्य नहीं ।
'इष्ट' पदकी सार्थकता—
इष्ट इति यत्रार्थे विवादेन साधनमुपन्यस्तं तस्य सिद्धिमिच्छता
सोऽनुक्तोऽपि वचनेन साध्यस्तदधिकरणत्वाद्विवादस्य ।
वादीने विवादके द्वारा सिद्ध करनेकी इच्छा रखते हुए जिस अर्थमें साधन दिया
है वह अर्थ वचनसे न कहा जानेपर भी साध्य है, क्योंकि विवादका अधिकरण वही है ।
यथा परार्थाश्चक्षुरादयः संघातत्वाच्छयनासनाद्यङ्गवदिति। अत्रा-
त्मार्था इत्यनुक्तावप्यात्मार्थतानेनोक्तमात्रमेव साध्यमित्युक्तं भवति ।
जैसे—चक्षु आदि पदार्थ ( दूसरेके लिये ) हैं । क्योंकि वह शयन, आसन
आदि अङ्गोंके समान संघातरूप हैं । यहां पर 'आत्मार्थ ( आत्माके लिये )' यह न
कहे जानेपर भी तात्पर्यसे निकलने वाली आत्मार्थता ही साध्य है, ऐसा कहा जाता है ।
'अनिराकृत' इस पदका समर्थन—
अनिराकृत इति । एतल्लक्षणयोगेऽपि यः साधयितुमिष्टोऽप्यर्थः
प्रत्यक्षानुमानप्रतीतिस्ववचनैर्निराक्रियते न स पक्ष इति प्रदर्शनार्थम्¹ ।
जिस अर्थको सिद्ध करना चाहते हैं उसमें उपर्युक्त सब लक्षणोंके होनेपर भी
यदि वह प्रत्यक्ष, अनुमान, प्रतीति और स्ववचनसे निराकृत ( निराकरण किया
हुआ ) हो तो वह पक्ष नहीं हो सकता । [ अनिराकृत पद ] यह दिखलानेके लिये
दिया गया है ।
तत्र प्रत्यक्षनिराकृतो यथा—अश्रावणः शब्द इति ।
प्रत्यक्षनिराकृत ( जिसका प्रत्यक्ष प्रमाणसे निराकरण किया जावे )—
जैसे—शब्द कर्ण इन्द्रियका विषय नहीं है ।
अनुमाननिराकृतो यथा—नित्यः शब्द इति ।
अनुमाननिराकृत—
जैसे—शब्द नित्य है ।
प्रतीतिनिराकृतो यथा—अचन्द्रः शशीति ।
प्रतीतिनिराकृत—
जैसे—शशी चन्द्रशब्दका वाच्य नहीं है ।
स्ववचननिराकृतो यथा—नानुमानं प्रमाणम् ।
१. पीटर्सन संस्करण में यहाँ विराम चिह्न नहीं है ।