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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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लखनऊ तथा श्री प्रो० कृष्णशास्त्री कानिटकर, शास० कला वाणिज्य महा०
इन्दौर आदि का भी हृदय से आभारी हूँ ।
नाट्यशास्त्र के सभी खण्डों में प्रशस्त सहकार के कारण डॉ० रुद्रदेवजी
त्रिपाठी, लालबहादुर संस्कृत विद्यापीठ, देहली का तथा हिन्दी के परम
सुकवि सुहृद्वर डॉ० शिवमङ्गल सिंह 'सुमन' ( भूतपूर्व कुलपति विक्रम
विश्वविद्यालय, उज्जैन ) का भी इस सन्दर्भ में विशेषतः आभारी हूँ ।
नाट्यशास्त्र के व्याख्यानादि लेखन के समस्त कार्य को मध्यप्रदेश शासन
की सेवा में रहकर करने के कारण मैं मध्यप्रदेश शासन के प्रति भी अपना
विनम्र आभार प्रदर्शन करता हूँ । साथ ही नाट्यशास्त्र जैसे महाग्रन्थ के
लेखन के सुदीर्घ समय में सदा एकनिष्ठ होकर सहयोग देने वाले मेरे
अपने परिवार के सभी सदस्य भी धन्यवाद के अधिकारी हैं ।
इसी प्रसंग में मैं गोलोकवासी श्रेष्ठप्रवर बाबू जयकृष्णदासजी गुप्त का
भी स्मरण आवश्यक मानता हूँ जो ऐसे आकरभूत शास्त्रीय ग्रन्थ के प्रकाशन
में सदा रुचि लेते रहे हैं ।
मैं चौखम्भा संस्कृत संस्थान के संचालक गुप्त बन्धुओं का भी आभारी हूँ
जिनने नाट्यशास्त्र के भागों को अपनी गौरवशाली परम्परा के अनुरूप
प्रस्तुत करने का अतिशय उद्यम किया । इसी परिवार के श्री पं० देवनारायण
झा जी का भी मुद्रण कार्य में सहयोग के कारण आभार व्यक्त करता हूँ ।
किं बहुना—
नाट्याम्नाय-नितान्ततान्तमनासामासेतुशीताचला—
क्षोणीमण्डलमध्यवर्तिविदुषामाभोगिनी चेतसाम् ।
जीयादुक्तिविवेकजालनिकरैः संशोधिता निस्तुलैः
गम्भीरा मधुरा प्रबोधजननी व्याख्या प्रदीपाभिधा ॥
उज्जयिनी, \ सुधीजनकृपाकाङ्क्षी
विजयादशमी, सं० २०३५ } बाबूलाल शुक्ल, शास्त्री