नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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तथा द्वितीय संस्करण के सम्पादक श्री पण्डित केदारनाथ साहित्यभूषण का
तथा काशी संस्कृत ग्रन्थमाला, काशी के नाट्यशास्त्र के सम्पादक श्री
बटुकनाथ शर्मा तथा पण्डित बलदेव उपाध्याय के प्रति भी अपनी कृतज्ञता
मानता हूँ जिनके संस्करणों ने प्रस्तुत संस्करण को संवारने में आधार प्रदान
किया। इसी प्रकार एशियाटिक सोसायटी कलकत्ता से प्रकाशित नाट्यशास्त्र
( श्री मनोमोहन घोष के अंग्रेजी अनुवाद सहित ) के संस्करण से भी पर्याप्त
सहायता मिलने से उसके प्रति भी अपनी हार्दिक कृतज्ञता प्रकट करता हूँ।
इसके अतिरिक्त नाट्यशास्त्रीय वाङ्मय के प्राचीन ग्रन्थकारों के प्रति तथा
अभिनव संशोधकों तथा समालोचकों का भी कृतज्ञ हूँ जिनके ग्रन्थों के
अनुशीलन ने मुझे प्रस्तुत संस्करण में अनेक अभिनव तथ्यों तथा शास्त्रीयप्रमेयों
पर अनेक दृष्टिकोणों से विचार तथा विषय मीमांसा करने में प्रवृत्त
करवाया।
प्रस्तुत ग्रन्थ के लेखन-काल में जिन अनेक ख्यातिप्राप्त विद्वानों, मित्रों
तथा लेखकों का हार्दिक एवं व्यावहारिक सहयोग मिला था तथा जिसका
प्रथम भाग में उल्लेख किया जा चुका है उन महानुभावों के साथ साथ उसी
क्रम में श्री डॉ० प्रभाकर नारायणजी कवठेकर, कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय,
उज्जैन का विशेष रूप से आभारी हूँ, जिसने इस नाट्यशास्त्र के प्रदीप व्याख्यान
को अपनी गुणग्राहिता तथा उदारता से नाट्यशास्त्र की तात्विक मीमांसा को
प्रश्रय दिया। इसी प्रकार इन्दौर के शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय
के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ० देवेन्द्रकुमारजी जैन का भी नाट्यशास्त्र
की समीक्षा करने ( 'नई दुनिया' दैनिक में ) के कारण आभारी हूँ।
नाट्यशास्त्र के प्रदीप व्याख्यान को प्रोत्साहित कर शीघ्र प्रकाशित करवाने
के आग्रह के साथ साथ उसके अनुशीलन को अनुशंसित करने वाले विद्वानों
में स्व० श्री डॉ० बलदेवप्रसादजी मिश्र ( विधायक तथा सुप्रसिद्ध मानसमर्मज्ञ
एवं समीक्षक—राजनांदगाँव ), श्री सुधाकर पाण्डेय—( प्रधानमन्त्री काशी
नागरी प्रचारिणी सभा, काशी ), प्रो० श्री डॉ० श्यामसुन्दरलाल दीक्षित
अमरावती का भी मैं कृतज्ञ हूँ। इसके अतिरिक्त प्राध्यापक श्री वेङ्कटाचलजी,
अध्यक्ष संस्कृत विभाग, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, सुहृद्वर डॉ० रामेश्वर
शर्मा, रीडर नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर, प्रो० गणेशदत्त त्रिपाठी, हिन्दी
विभाग, शास० कला वाणिज्य महा०, इन्दौर, डॉ० लक्ष्मण नारायण शुक्ल,
प्राध्यापक संस्कृत महाविद्यालय, इन्दौर, प्रो० हर्षदधोलकिया, संस्कृत
महाविद्यालय, इन्दौर, प्रो० डॉ० पुरु दाधीच, भातखण्डे संगीत महाविद्यालय,