नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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गयी है जो अपना मौलिक महत्व रखती है साथ ही अपेक्षित रेखाचित्र
भी इस भाग में लगा दिये गये हैं जिनसे इस भाग का भी प्रथमभाग की
तरह ही अधिक उपयोग होगा ।
नाट्यशास्त्र के प्रथमभाग के प्रकाशन के बाद से ही इस कार्य को कुछ
सफलताएँ भी मिली हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों में यह अनुमोदित एवं
पाठ्य ग्रन्थ का गौरव प्राप्त कर रहा है जो अगले सभी भागों को भी प्राप्त
होगा, यही आशा है। इस कार्य में सहृदय सुधीजन एवं संशोधक छात्रों एवं
गुणग्राही विद्वानों का जो सहयोग रहा उसके प्रति मैं अतिशय कृतज्ञता
व्यक्त करता हूँ ।
प्रकाशन कार्य के सन्दर्भ में एक निवेदन और करना है। यह ग्रन्थ
अब वाराणसी की प्रसिद्ध संस्कृत ग्रन्थों की प्रकाशन संस्था—‘चौखम्भा
संस्कृत संस्थान’ से प्रकाशित हो रहा है तथा आगे के सभी भाग इसी
क्रम में प्रकाशित हो रहे हैं। यह प्रसन्नता की बात है कि इस गौरवशाली
ग्रन्थ को पूरी तत्परता एवं तन्मयता से प्रकाशित करने की इनकी निष्ठा को
सहृदय पाठक स्वागतार्ह मानेंगे तथा इन्हें प्रोत्साहन देंगे । मैं इस ग्रन्थ
के मुद्रणादि में होने वाली त्रुटियों के लिए सहृदय सुधीजन से क्षमाप्रार्थी
हूँ तथा विलम्ब के लिये भी ।
विजया दशमी } सुधीजनकृपाकाङ्क्षी
वि० सं० २०३५ } बाबूलाल शुक्ल, शास्त्री