नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपुरोवाक्
“नाट्यशास्त्र” के प्रदीपव्याख्यादि के साथ मण्डित द्वितीय भाग को
प्रस्तुत क्रम में प्रकाशित कर सुधीजन के सम्मुख रखते हुए आज प्रसन्नता
और सन्तोष है। यह द्वितीय भाग भी प्रथम भाग के प्रकाशित होने के
पाँच वर्ष पश्चात् प्रस्तुत हो सका। इन पाँच वर्षों के अन्तराल में परि-
स्थितिवश अनेक ऐसे परिवर्तन लेखक तथा प्रकाशक के यहाँ घटित हुए
जिनने इस ग्रन्थ को यथासमय प्रस्तुत न होने दिया। इतना प्रत्यूहव्यूह
भेदन होने पर यह द्वितीय भाग अब सुधीजन की सेवा में प्रस्तुत हो रहा
है। अतः इसका भी प्रथम भाग की तरह ही स्वागत होगा, यह पूर्ण विश्वास
है। इसी के साथ यह भी आशा है कि अब तृतीय तथा चतुर्थ भाग में
प्रकाशनगत विलम्ब अधिक मात्रा में नहीं होगा तथा इसमें शेष भाग
यथासमय प्रकाशित हो जाएँगे (क्योंकि इनका मुद्रण भी प्रगति पर है तथा
शीघ्र ही पूर्ण हो जायगा)।
नाट्यशास्त्र के इस भाग में भी प्रथमखण्ड की तरह प्रस्तावना में
इसी भाग से सम्बद्ध विषयों की विवेचना रखी गयी है जिससे नाट्य जैसे
विस्तीर्ण एवं व्यापक शास्त्र के अध्ययन में सहायता मिलेगी। परिशिष्ट
१ में विस्तीर्ण व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ पूर्व खण्ड की तरह रखी गयी हैं
तथा छन्दों के एक प्रक्षिप्त भाग को भी सानुवाद रखा गया है। लक्षणों तथा
हस्तमुद्राओं का विवेचनात्मक विवरण परिशिष्ट तथा प्रस्तावना में है जिसे
उपयोग की दृष्टि से दोनों स्थानों पर रखा गया है। नाट्यशास्त्र के नवम
अध्याय के अन्तर्गत हस्तमुद्राओं की उत्पत्तिकथा भी यथास्थान लगायी