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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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४६२ नाट्यशास्त्र
१०. हेतु :— जो वचन फल को सिद्ध करने का सामर्थ्य लिये हो,
जिसमें शब्द एवं अर्थ परिमित रहे तथा जो विचित्र शैली में कहे जाएँ तो—
'हेतु'। जैसे तापसवत्सराज के षष्ठ अंक में मरण का निश्चय करने वाली
वासवदत्ता को समझाने के लिये यौगन्धरायण का यह कथनः—
आसृष्टेः प्रतिपार्थिवं युवतयो जाताः मनोवल्लभाः
मग्नास्ते व्यसनार्णवे च बहवस्ताभिः सहैवेश्वराः ।
देव्या यत्तु कृतं तदाविकलतामुत्सृज्य लोकोत्तरं
तस्यैषा कृपणोचितेन विधिना किं ग्लानिरुत्पद्यते ॥
[ जब से इस सृष्टि का आरम्भ हुआ है तभी से प्रत्येक राजा को उसकी
मनोनुकूल युवतियाँ प्रिय होती रही है । ये प्रेयसियाँ घोर शङ्का में निमग्न
रही और उनके समर्थ एवं ईश्वर पति भी इसी में डूब गये । किन्तु महादेवी
ने जो उस समय ( भी ) विकलता को छोड़ कर लोकोत्तर कार्य कर
डाला उसके विषय में अब यह दीनता से ग्लानि क्यों उत्पन्न हो रही है । ]
यहाँ देवी ने जो किया वह इष्टार्थ साधक है तथा उससे शीघ्र ही आप
स्वयं शुभफल का अनुभव करेंगी।" इत्यादि में हेतु है ।
११. संशय :—वाक्य के पूर्णतः समाप्त न होने से साध्यविषय के स्वरूप
या अवस्था में सन्दिग्धता आना 'संशय' है। इसका अर्थ एवं काम प्रधान
रूपकों में निपुणता के साथ प्रयोग रखा जाता है। जैसे—कुन्दमाला के षष्ठ
अंक में रामायण कथा के वाचक लव तथा कुश कहते हैं:—
सीतां निर्जनसंम्पाते चण्डश्वापदसङ्कुले ।
परित्यज्य महारण्ये लक्ष्मणोऽपि न्यवर्तत ॥
ततः प्राणैः परित्यक्ता निराशा जनकात्मजा ।
( इति तूष्णीं भवतः )
अप्रियाख्यानभीतेन कविना संहृता कथा ॥
किमितः कल्याणमावेदयति । एवं तावदनुयोक्ष्ये । ( इति पृच्छतः )
[ निर्जन तथा भयंकर हिंसक प्राणियों से व्याप्त महारण्य में सीता का
परित्याग कर ( जल्द ) लक्ष्मण जी वापस चले गये तब प्राणों से भी प्रिय एवं
प्रियजन के द्वारा छोड़ी गयी निराश सीता ने—
( इतना कहकर चुप हो जाते हैं )
( तब राम और लक्ष्मण कहते हैं कि )— सम्भव है अप्रिय सत्य के
कहने से डर कर कवि ने यहीं कथा का उपसंहार कर डाला हो । ]