सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

पृष्ठ 572, कुल 668 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 572

परिशिष्ट : टिप्पणी, अध्याय १७ ४६१
अथवा—“अभिज्ञानशाकुन्तल” के सप्तमांक में-‘शकुन्तलावण्यं पश्य’
में ‘शकुन्तला’ पद से शकुन्त के लावण्य तथा शकुन्तला को सूचित करना ।
८. शोभा :—जहाँ सिद्ध प्रयोजनों से असिद्ध का चमत्कारी अर्थ निर्णय
करता या सूचना देता है और वह भी शुभ संघटना, श्लेष, वक्रोक्ति या ध्वनि
की महिमा द्वारा तो वह ‘शोभा’ होती है । कई लोक-स्वभाव के प्रकटन को
‘शोभा’ बतलाते हैं । अन्य जन युवक एवं युवतियों के सहज मनोभावों का
प्रकटन ‘शोभा’ मानते हैं । यह अर्थ प्रधान वस्तु में परम शोभा प्राप्त करती
है । जैसे रत्नावली के प्रथम अंक में यौगन्धरायण—‘द्वीपादन्यस्मादित्यादि’
( २ ० १ । ६ ) के बाद कहता है कि—
प्रारब्धेऽस्मिन् स्वामिनो वृद्धिहेतौ
दैवेनेत्थं दत्तहस्तावलम्बे ।
सिद्धे भ्रान्तिर्नास्ति सत्यं तथापि
स्वेच्छाचारी भीत एवास्मि भर्तुः ॥ ( रत्ना ० १ । ७ )
[ स्वामी के अभ्युदयार्थ जो कार्यारम्भ किया गया है उसी में भाग्य के
द्वारा इस प्रकार सहारा दे दिया है कि अब उसकी सिद्धि में सन्देह नहीं रहा
है, परन्तु फिर भी यह सभी मैंने अपने ही मन से किया इसलिये अपने स्वामी
से भयभीत मैं अवश्य हूँ । ]
कथाशरीर की संघटना रूप शोभा के आधार पर ही यहाँ मधुरता की
प्रसक्ति है ।
६. उदाहरण:—जहाँ दूसरों के ( शत्रु आदि जन के ) परम रहस्य
पूर्ण या दुर्भेद्य अर्थ को तुल्यार्थक वाक्य से दूसरों के लिये निपुण जन प्रकाशित
कर दें तो—‘उदाहरण’ है । जैसे देवीचन्द्रगुप्त नाटक में प्रावेशिकी ध्रुवा से
संशयाकुल चित्त वाले चन्द्रगुप्त के प्रवेश सूचक अर्थ को द्योतित करना ।
जैसे—
एसो सिअकर-वित्थर-पणासिआसेसवेरितिमिरोहो ।
णिअविहवरोणचन्दो गअणगिहं लंघिऊँ विसई ॥—
एषः शीतकरविस्तरप्रणाशिताशेषवैरितिमिरौघः ।
निजविभववरश्चन्द्रो गगनगृहं लङ्घितुं विशति ॥
[ यह चन्द्र अपने शीतल करों के फैलाव से समग्र शत्रुभूत अन्धकार को
नष्ट करते हुए अपने ही आकाश रूप गृह को पार करने की इच्छा के लिये
वहाँ प्रवेश कर रहा है । ]