नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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का सहयोग रखें तो फिर नियमन नहीं हो पाएगा तथा खण्डों से मण्डलों
का प्रविभाग भी नहीं बन पाएगा । आशय यही है कि चारी में एक पाद का,
करण में दो पादों का, खण्ड में छः पादों का इस प्रकार पादवृत्तियों से एक
के बाद बढ़नेवाले अभिनय बनते हैं, जिन्हें मध्यम व्यायाम समझना चाहिए ।
तीन या चार खण्डों से 'मण्डल' का आशय है कि केवल तीन या चार
खण्डों से ही मण्डल बनता हो ऐसा नहीं समझना चाहिए; क्योंकि पाँच, 'छः
या सात खण्डों से भी मण्डल बनाता है जिन्हें आगे कहा भी गया है ।
५. चारी से अनेक कार्य साधे जाते हैं। यथा—शस्त्र का फेंकना,
सुदर्शनादि चक्र का प्रक्षेप, कुन्त (भाले) का फेंकना, युद्ध में हनन तथा
प्रतिहनन के अभिनय आदि जिनमें चारी का ही उपयोग होता है ।
६. यहाँ 'यत्' शब्द से चारियों का परामर्श किया गया है जो नाट्य-
प्रदेश की विस्तीर्णता का संकेत करता है। जो अभिनय मस्तक तथा हस्त
जैसे अंगों द्वारा स्वतन्त्ररूप में प्रस्तुत किया जाता है पर इन सभी अङ्गों का
पूर्वापरभाव के साथ चारी के साथ भी प्रयोग किया जाता है तथा चारी
का भी इसी कारण पूर्वापरभाव से उपयुक्तता में ध्यान में रख कर (इनके
साथ) प्रयोग रखा जाता है ।
७. इस कारिका में चारी की योजना के प्रदेश दिखलाये गये हैं ।
इनमें नृत्त में करण तथा अङ्गहारों के अभिनयप्रदर्शन आदि में इनका योग
रहता है । जिसे कहा जा चुका है तथा आगे भी विषयानुसार बतलाया
जाएगा । युद्ध के विषय में इनकी योजना को न्याय के प्रसंग में आगे कहा
जाएगा तथा गति के विषय में इनके प्रयोगादि का विवरण गतिप्रचार
नामक १३ वे अध्याय में आगे दिया जाएगा । इस प्रकार तीन अध्यायों में
प्रतिपाद्य अर्थ को यहाँ तीन शब्दों (नृत्ते, युद्धे, गतौ) के द्वारा सूचित किया
गया है ।
८-१३. भूमि में या उस पर सम्पन्न होने से इन्हें 'भौमीचारी' कहते हैं ।
इसी प्रकार ऊपर या आकाश में चलने वालों की आकाशिकी चारी होगी ।
प्रभेद चारियाँ सोलह हैं । इसी प्रकार आकाशिकी चारी के भी सोलह
भौमी होते हैं । (क्रमशः विवरण आगे से आरम्भ होता है ।)
१४. समपादाचारी :—क्योंकि पादादि के समानकरण होने पर चलना
तो होगा ही, जो आगे या पीछे ऊपर या नीचे रहेगा तो ऐसी स्थिति में चारी
भी और समपादा भी समता के कारण कैसे होगी ? इसके उत्तर में यही
कहा जा सकता हैं कि जब अभिनेता किसी स्थान विशेष में पैरों को समान