नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 507, कुल 668 में से
संदर्भ में पढ़ें३९६ नाट्यशास्त्र
यदि मध्यमा और अनामिका दोनों उङ्गलियों के अग्रभागों को अङ्गूठे
से मिला दिया जाए और शेष दोनों उङ्गलियों के अग्रभागों को सीधे ताना
या फैला दिया जाए तो उसे 'सिंहमुख' हस्त कहते हैं ।
होमे शशे गजे दर्भचलने पद्मदामनि ।
सिंहासने वैद्यपाके शोधने सम्प्रयुज्यते ॥ ( १४२-१४४ )
योजना—हवनकर्म, खरहा, हाथी, लहराती कुशाएँ, कमल की माला,
सिंह का मुख, वैद्य द्वारा निर्मित पाक तथा उसके शोधन को सिंहमुख हस्त
के द्वारा दिखलाया जाता है ।
त्रिशूल :—
निकुञ्चनयुताङ्गुष्ठकनिष्ठस्तु त्रिशूलकः ।
यदि कनिष्ठा और अँगूठे को झुका कर मिला दिया जाए ( और तीनों
अँगुलियाँ अलग-अलग सीधी फैली हुई रहें ) तो त्रिशूल हस्त कहलाता है ।
बिल्वपत्रे त्रित्वयुक्ते त्रिशूलकर ईरितः । ( १६५ )
योजना—तीन पत्रों वाले बिल्वपत्र या तीन पदार्थों के निर्देश में त्रिशूल
हस्त की योजना की जाती है ।
व्याघ्र :—
कनिष्ठाऽङ्गुष्ठनमने मृगशीर्षकरे तथा ।
व्याघ्रहस्तः स विज्ञेयो भरतागमकोविदैः ॥
यदि मृगशीर्ष हस्त में कनिष्ठा और अँगूठे को झुका लिया जाए तो वह
'व्याघ्रहस्त' कहलाता है ।
व्याघ्रे भेके मर्कटे च शुक्तौ संयुज्यते करः । ( १६६-१६७ )
योजना—व्याघ्र, मेंढक, बन्दर, सीप ( शुक्ति ) के भाव को बतलाने में
'व्याघ्र-हस्त' की योजना की जाती है ।
अर्धसूची :—
कपित्थे तर्जनी ऊर्ध्वसारणे त्वर्धसूचिकः ।
यदि कपित्थहस्त में तर्जनी ऊपर सीधी फैला कर रखी जाए तो
'अर्धसूची' हस्त कहलाता है ।
अङ्कुरे पक्षिशावादौ बृहत्कीटे नियुज्यते । ( १६७-१६८ हैं
योजना—बीज के अङ्कुर, चिड़ियों के बच्चे, बड़े कीड़े मकोड़े को बतलाने
में 'अर्धसूची' हस्त की योजना की जाती है ।