नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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योजना का विशेष उल्लेख है। मल्लयुद्ध की स्थिति में दोनों हाथों के द्वारा
मुष्टि हस्त का प्रयोग होना चाहिए।
५६-५७. शिखर हस्त :- धनुष की डोरी आदि धारण करने की
स्थिति में इस ऊर्ध्वगामी हस्त को उत्तान और पार्श्वगामी हस्त को अधोमुख
करते हुए या उत्तान हस्त को ऊपर ले जाते हुए और अधोमुख को बाजू में
ले जाकर अभिनय किया जाए। 'आलक्तकोत्पीडने चैव' के अनुसार अर्थ
है—महावर लगाने तथा उत्पीडन करने में। बालकों के कपोल को मुष्टि
हस्त के हाथ के अंगूठे और तर्जनी से दबाने पर 'उत्पीडन' दर्शाया जा
सकता है। (अभि० आ०) 'अभिनयदर्पण' में इस हस्त की योजना—
कामातुरता, धनुष, स्तम्भ, निश्चय, पितृकर्म, ओठ पर दाँत गड़ाने, शिव
लिंग पूजन, निषेध वाक्य कथन, स्मरण, अभिनय कर्म की समाप्ति, करधनी
खींचने; आलिङ्गन करने तथा घण्टानाद करने के भाव व्यक्त करने में—की
जाती है। (अभि० द० ११८-१२१)
५८-५६. कपित्थ हस्त :- इस हस्त में अंगुष्ठ तथा तर्जनी का कार्य
रहता है अभिनय प्रदर्शन में। कार्य पद से 'सत्कर्म' अर्थ लिया जा सकता
है तथा चुटकी बजाने के कार्य भी इसी से सूचित होते हैं। अभिनयदर्पण
में इसकी योजना—लक्ष्मी, सरस्वती, नटों द्वारा ताल धारण, गौदोहन, अंजन
लगाना, क्रीडा कौतुकादि के अवसर पर पुष्पधारण, कंचुकी या आंचल
पकड़ने, घूंघट निकालने और धूपदीप से अर्चन करने के भाव में—की जाती
है। (अभि० द० १२१-१२४)
६०-६३. कटकामुख हस्त :- कारिका में प्रयुक्त 'सकनीयसी' पद का
आशय है कि अनामिका और कनिष्ठिका में थोड़ी दूरी रहनी चाहिए, अर्थात्
दोनों संश्लिष्ट न रहें। खट् कांक्षायाम् भ्वादिगणीय धातु है जिसमें भूख,
तृषा या पिपासा अर्थ में वुन् प्रत्यय होकर 'खटक' (या कटक) शब्द बनता
है। यह 'खटकामुख' हस्त की व्युत्पत्ति है। अग्नि में हव्य जिस पात्र से
छोड़ते हैं उस स्रुक् स्रुवादि का अभिनय उत्तान हस्त के द्वारा किया जाता है।
अभिमुख हस्त से हव्य, आज्य आदि का अभिनय होता है। लगाम खींचना
अश्व की गति रोकने या नियंत्रण करने में उपयुक्त होती है और इसका
अभिनय परिकर्षण या खींचने वाले इसी हस्त से किया जाता है तथा
हिलते हुए हाथों को रखा जाता है। आदर्श का धारण सम्मुख रखे गये
हस्त से होता है। नर्तकी इसके द्वारा 'मैं सुन्दर हूँ' इस प्रकार की आकृति