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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

पृष्ठ 459, कुल 668 में से

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पृष्ठ 459

३४८ नाट्यशास्त्रम्
देवाश्च लिङ्गिनश्चैव नानाश्रुतधराश्च ये१।
भगवन्निति ते वाच्याः पुरुषैः स्त्रीभिरेव च ॥ ४ ॥
इसी प्रकार जो १देवता, संन्यासी वेशधारी साधुजन तथा विविध शास्त्रों
के विद्वान् हों उन्हें भी पुरुष या स्त्रियों के द्वारा 'भगवन्' शब्द से सम्बोधित
किया जाए ॥ ४ ॥
ब्राह्मण के लिए सम्बोधन शब्द—
आर्येति ब्राह्मणं ब्रूयात् ,
ब्राह्मणों को 'आर्य'२ शब्द से सम्बोधित किया जाए ।
राजा के लिए सम्बोधन शब्द—
महाराजेति २पार्थिवम् ।
राजा को 'महाराज'३ शब्द से सम्बोधित किया जाए ।
गुरु तथा शिक्षक आदि के लिये सम्बोधन शब्द—
उपाध्यायेति चाचार्यं वृद्धं तातेति चैवहि ॥ ५ ॥
उपाध्याय या शिक्षक को ४'आचार्य' शब्द से सम्बोधित करना चाहिए
और बूढ़े मनुष्य को 'तात'५ ( बाबा ) शब्द से सम्बोधित किया जाए ॥५॥
ब्राह्मण द्वारा राजा के प्रति सम्बोधन शब्द—
३नाम्ना राजेति वा वाच्या ब्राह्मणेस्तु नराधिपाः ।
तत्क्षाम्यं हि ४महीपालैर्यस्मात् पूज्या द्विजाः५ स्मृताः ॥ ६ ॥
ब्राह्मणों के द्वारा राजा को६ उसीका नाम लेकर या अन्य शब्द से

१. उदाहरणार्थ—अविमारक ना० (भास) में अग्नि और वरुण के सम्बोधन
तथा माल० वि० नाटक (कालि०) में परिव्राजिका का सम्बोधन ।
२. जैसे मध्यम व्यायोग में भीम को ब्राह्मणोचित सम्बोधन दिया गया है ।
३. जैसे प्रतिमा में दशरथ को सुमन्त्र द्वारा महाराज शब्द से दिया गया
सम्बोधन ।
४. जैसे मुद्राराक्षस में चाणक्य का शिष्य द्वारा उपाध्याय पद से सम्बोधन ।
५. जैसे प्रतिमा में सुमन्त्र का भरत को तात शब्द से सम्बोधन ।
६. जैसे मुद्रारा० में चन्द्रगुप्त को चाणक्य द्वारा दिये गए सम्बोधन ।

१. इमश्रुधराश्च—क०; श्रुतिधराश्च ये—ग० ।
२. पार्थिवः—क० । ३. छन्दतो नामभिर्वाच्या—ख०; ग० ।
४. तु—ख० । ५. द्विजोत्तमाः—ख०; ग० ।