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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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३९० : नाट्यशास्त्रम्
करना चाहिए, क्योंकि इन्हीं देशों की प्रजा पर इस प्रवृत्ति का नाट्यप्रयोग
निर्भर करता है ॥ ४२ ॥
अङ्गा वङ्गाः कलिङ्गाश्च वत्साश्चैवोढ्रमागधाः ।
पौण्ड्रनेपालकाश्चैव अन्तर्गिरिबहिर्गिराः ॥ ४३ ॥
तथा प्लवङ्गमा³ ज्ञेया मलदा मल्लवर्तकाः ।
ब्रह्मोत्तरप्रभृतयो भार्गवा मार्गवास्तथा ॥ ४४ ॥
प्राग्ज्योतिषाः पुलिन्दाश्च वैदेहास्ताम्रलिप्तकाः ।
प्रांक्प्रभृतयश्चैव⁵ युञ्जन्त्यौढ्रमागधीम्⁶ ॥ ४५ ॥
पूर्वीय प्रदेशों में (जो) अंग, वंग, कलिंग, वत्स, उढ़ (औढ़)
मगध, पुण्ड्र, नेपाल, अन्तर्गिरि, बहिर्गिरि, प्लवंगम, मलदा, मल्लवर्तक,
ब्रह्मोत्तर, भार्गव, मार्गव, प्राग्ज्योतिष, पुलिन्द (न्ध), विदेह तथा
ताम्रलिप्त (आदि) प्रदेश हैं वे औढ्रमागधी प्रवृत्ति के प्रयोग को पसन्द
करते हैं ॥ ४३-४५ ॥
अन्येऽपि देशाः प्राच्यां⁷ ये पुराणे सम्प्रकीर्तिताः ।
तेषु प्रयुज्यते ह्येषा⁸ प्रवृत्तिश्चौढ्रमागधी⁹ ॥ ४६ ॥
इसी प्रकार पुराण आदि में जो पूर्वीय प्रदेश कहे गए हैं उनमें भी
इसी औढ्रमागधी प्रवृत्ति का व्यवहार होता है [और इस प्रवृत्ति में
भारती तथा कैशिकी वृत्ति प्रधान रहती है।] ॥ ४६ ॥
पांचालमध्यमा प्रवृत्ति—
पाञ्चालाः शौरसेनाश्च काश्मीरा हास्तिनापुराः ।
वाह्लीकाः शाकलाश्चैव¹⁰ मद्रकौशीनरास्तथा ॥ ४७ ॥
१. कलिंग = वर्तमान उड़ीसा के आसपास का प्रदेश । मलदा = वर्तमान
मालदह जिला जो बंगाल में है। मल्लवर्तक = वर्तमान मल्लभूम प्रवेश (बंगाल
में बांकुरा) । भार्गव और मार्गव शब्द अस्पष्ट हैं और सम्प्रति इस नाम के कोई
प्रदेश प्राप्त नहीं होते ।
१. पौण्ड्रा नैपालिकाश्चैव—ख०; ग० । २. बहिर्दुराः—ख०; ग० ।
३. प्लवङ्गमाहेन्द्र मलदामलवर्तकाः—ख; ग० । ४. ताम्रलिप्तकाः—ख०; ग० ।
५. प्रांशुप्रवृत्तयः क०; प्राङ्गाप्रावृत्तयः—ख०; ग० ।
६. युज्यन्ति चौढ़मागधी—ख०; ग० । ७. प्राच्यां—ख०; ग० ।
८. त्वेषा—ख०; ग० । ९. चान्ध्रमागधी—क० ।
१०. शाल्यका—क० शाल्वका—घ० ।