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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

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एकादशोऽध्यायः १११
तलवार (शस्त्र) का छाती या कन्धों के पास घुमाना भारत न्याय
जैसा कैशिक न्याय में भी ठीक उसी तरह से रखना चाहिए। इसमें केवल
अन्त में शस्त्र को घुमाकर मस्तक के ऊपर ले जाया जाए ॥ ८४-८५ ॥
प्रविचाराः१ प्रयोक्तव्या ह्येवमेतेऽङ्गलीलया ॥ ८५ ॥
धनुर्वज्रो२ऽसिशस्त्राणां प्रयोक्तव्या विमोक्षणे ।
शरीर की लीला युक्त हलचलों के साथ इन न्यायों के द्वारा धनुष, वज्र,
तलवार आदि शस्त्रों को घुमाना (या चलाना) चाहिए ॥ ८५-८६ ॥
न भेद्यं नापि च च्छेद्यं न चापि रुधिरस्रुतिः ॥ ८६ ॥
रङ्गे३ प्रहरणे कार्यो न चापि व्यक्तघातनम् ।
४संज्ञामात्रेण कर्तव्यं शस्त्राणां मोक्षणं बुधैः ॥ ८७ ॥
अथवाभिनयोपेतं कुर्याच्छेदं विधानतः ।
रंगमंच पर प्रदर्शित होनेवाले (इन) युद्धों में भेदन, छेदन और रक्त
का बहना या यथार्थ प्रहार नहीं ब