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नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 309 में से

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पृष्ठ 163

( १३१ )
मीठा बोलना भी जानते हैं ।
चेटी - (हँसकर) अरी उल्टी बातें कहने वाली ! यह तो सच्चाई है ।
इस में मीठा बोल (चापलूसी) क्या है ?
नायक - चतुरिका ! कुसुमाकर उद्यान का मार्ग बता ।
चेटी - आइए, स्वामी ! आइए ।
नायक - (घूमते हुए, नायिका से) देवी ! ज़रा धीरे धीरे आइए ।
तुम्हारे स्तनों का भार ही तुम्हारी कमर को कष्ट देने के लिए
(पर्याप्त) है, फिर दूसरे हार से क्या (लाभ) ? नितम्बों के भार
से ही दोनों जंघाएँ खिन्न हैं; फिर इस मेखला से क्या (लाभ) ?
दोनों जँघाओं को वहन करने की शक्ति (भी) तेरे पैरों में नहीं
फिर यह नूपुर (पाज़ेब) क्यों ? तुम तो अपने (सुन्दर)
से ही विभूषित (सजी हुई) हो, फिर (इन अङ्गों को) क्लेश
देने के लिए इन आभूषणों को क्यों धारण कर रही हो ?
चेटी - यही वह कुसुमाकर उद्यान है । तो स्वामी प्रवेश करें ।
[सब प्रवेश करते हैं]

  1. विरोधी पक्ष का समर्थन करने वाली; विरुद्ध, विपरीत अथवा
    प्रतिकूल भाषिणी; उल्टी बातें करने वाली ।
  2. थक गई हैं; खिन्न हैं; क्लेश अनुभव कर रही हैं ।