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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 45

३६ मुहूर्तचिन्तामणि
अन्वयः—विरिक्ते (तिथौ) शुक्रेज्यार्केह्नि, मैत्रध्रुवलघुसहितादित्यशाक्रद्विदैवे,
स्थिराख्ये लग्नेऽपि, शशिनि शुभदृष्टे, शुभैः केन्द्रगैः, कुन्तवर्मेष्वसनशरकृपाणासिपुत्र्यः
सन्धार्याः स्युः। ध्रुवमृदुलघुहर्यन्तकादित्ये शय्यासनादेः भोगः इष्टः स्यात् ॥ २१ ॥
रिक्ता तिथियों को छोड़ अन्य तिथियों में, शुक्र, बृहस्पति और रविवार
में, मैत्रसंज्ञक, ध्रुवसंज्ञक, लघुसंज्ञकसहित पुनर्वसु, ज्येष्ठा और विशाखा
नक्षत्र में; स्थिर अर्थात् वृष, सिंह, वृश्चिक अथवा कुम्भ लग्न में चन्द्रमा के
रहते और शुभ ग्रहों से देखते तथा केन्द्र में शुभ ग्रहों के रहते बरछी, कवच,
धनुष-बाण, तलवार, छुरी आदि धारण करना चाहिए। ध्रुवसंज्ञक, मृदु-
संज्ञक, लघुसंज्ञक, श्रवण, भरणी और पुनर्वसु में शय्या और आसन आदि
का उपभोग हितकारक होता है ॥ २१ ॥
नक्षत्रों की अन्धाक्षादि संज्ञा
अन्धाक्षं वसुपुष्यधातृजलभद्धीशार्यमान्त्याभिधं
मन्दाक्षं रविविश्वमैत्रजलपाश्लेषाश्विचन्द्रं भवेत् ।
मध्याक्षं शिवपित्रजैकचरणत्वाष्ट्रेन्द्रविध्यन्तकं
स्वक्षं स्वात्यदितिश्रवोदहन बाहिर्बुध्न्यरक्षोभगम् ॥ २२ ॥
अन्वयः—वसुपुष्यधातृजलभद्धीशार्यमान्त्याभिधं अन्धाक्षं भवेत्, रविविश्वमित्रजल-
पाश्लेषाश्विचन्द्रं मन्दाक्षं भवेत्, शिवपित्रजैकचरणत्वाष्ट्रेन्द्र विध्यन्तकं मध्याक्षं भवेत्,
स्वात्यदितिश्रवोदहनबाहिर्बुध्न्यरक्षोभगम् स्वक्षं भवेत् ॥ २२ ॥
धनिष्ठा, पुष्य, रोहिणी, पूर्वाषाढ़, विशाखा, उत्तराफाल्गुनी, रेवती इन
नक्षत्रों की अन्धाक्ष संज्ञा है; हस्त, उत्तराषाढ़, अनुराधा, शतभिष, आश्लेषा,
अश्विनी, मृगशिरा इन नक्षत्रों की मन्दाक्ष संज्ञा है, आर्द्रा, मघा, पूर्वाभाद्र-
पद, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित्, भरणी, इन नक्षत्रों की मध्याक्ष संज्ञा है
और स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, कृत्तिका, उत्तराभाद्रपद, मूल, पूर्वाफाल्गुनी,
इनकी स्वक्ष अर्थात् सुलोचन संज्ञा है ॥ २२ ॥
अन्धाक्षादि चक्र
| धनिष्ठा | पुष्य | रोहिणी | पू०षा० | विशाखा | उ०फा० | रेवती | अन्धाक्ष |
| हस्त | उ०षा० | अनुराधा | शतभिष | आश्ले० | अश्विनी | मृगशिरा | मन्दाक्ष |
| आर्द्रा | म० | पू०भा० | चित्रा | ज्येष्ठा | अभि० | भरणी | मध्याक्ष |
| स्वाती | पुनर्वसु | श्रवण | कृत्तिका | उ०भा० | मूल | पू०फा० | स्वक्ष |