मीमांसा दर्शन / पूर्वमीमांसा (शाबर भाष्य सहित)
Purva Mimamsa Darshan with Shabara Bhashya
महर्षि जैमिनि / शाबर स्वामी द्वारा
स्रोत: तारा प्रिंटिंग वाराणसी · तारा प्रिंटिंग वाराणसी · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 555, कुल 804 में से
संदर्भ में पढ़ें२१ ] प्रथमाध्याये तृतीयपादः ५०१
तन्त्रवार्तिक में अनेक सूत्रों के आधार पर इस संज्ञा को प्रदर्शित किया है। यथा
तत्र, जातः (४।३।२५) इस पाणिनि सूत्र से उस स्थान में जन्म ग्रहण करने के अर्थ
में अण् प्रत्यय का प्रयोग होता है—माथुरः=मथुरा में उत्पन्न व्यक्ति ।
प्रायो भवः (४।३।३९) उस स्थान में प्रायः रहने पर भी अण् प्रत्यय होने से यह
प्रयोग हो सकता है, यथा मथुरा में प्रायः अर्थात् अधिक रहने वाले व्यक्ति के लिए
माथुरः यह प्रयोग हो सकता है ।
सम्भूते (४।३।४१) वहाँ पर होने की सम्भावना में भी अण् प्रत्यय होने से यह
प्रयोग हो सकता है । यथा -मथुरा में होने की सम्भावना से=माथुरः ।
तत्र भवः (४।३।५३) वहाँ पर विद्यमान इस अर्थ में भी अण् प्रत्यय होने से मथुरा
में वर्तमान व्यक्ति के लिए भी माथुरः प्रयोग होता है ।
तत आगतः (४।३।७४) वहाँ से आया हुआ इस अर्थ में भी अण् प्रत्यय होने से
मथुरा से आए हुए व्यक्ति जो अन्य स्थान में निवास कर रहा है, उसके लिए भी माथुरः
प्रयोग होता है ।
प्रभवति (४।३।८३) जिस स्थान में प्रथम प्रकट हुआ ।
जैसे—हिमवान् से प्रकट गङ्गा के लिए हैमवती गङ्गा प्रयोग होता है ।
तद् गच्छति पथिदूतयोः (४।३।८५) उस स्थान में जाने वाले मार्ग और उस स्थान
में जाने वाले दूत के अर्थ में भी अण् प्रत्यय होने से यह प्रयोग होता है, जैसे मथुरा की
ओर जाने वाला मार्ग या दूत के लिए माथुरः यह प्रयोग होता है ।
अभिनिष्क्रामति द्वारम् (४।३।८६) उस तरफ खुलने वाला द्वार या उस ओर
निकलने वाले द्वार के अर्थ में भी अण् प्रत्यय होने से इस अर्थ में भी यह प्रयोग होता
है । यथा—मथुरा की ओर का द्वार माथुर कहा जाता है ।
सोऽस्य निवासः (४।३।८९) जहाँ निवास का स्थान रहता है इस अर्थ में भी अण्
प्रत्यय होता है । जैसे मथुरा में जिसका निवास है—वह माथुर है ।
अभिजनश्च (४।३।९०) पूर्वजों के निवास के अर्थ में भी अण् प्रत्यय होता है ।
यथा मथुरा में जिसके पूर्वजों का निवास है; वह भी माथुर है ।
भक्ति (४।३।९५) जो स्थान उसका सेवनीय रहता है, इस अर्थ में भी अण् प्रत्यय
होने से वह माथुर कहा जाता है ।
तस्येदम् (४।३।१२०) उसका यह समान है, इस अर्थ में अण् प्रत्यय होने से यह
प्रयोग होता है जैसे—मथुरा का यह पदार्थ माथुर ।
इस प्रकार माथुर शब्द से अनेक अर्थों की प्रतीति होने से माथुर शब्द के प्रयोग से
केवल उसी अर्थ की प्रतीति सम्भव नहीं है ॥ २१ ॥