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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 70

१० मीरां-बृहद्-पद-संग्रह
पावडी¹ पंगलियां चापसी² माला बुझै मन की बात ।
हरिदास दर्जी की बीनती जी, धोला³ वस्त्र सिमाओ जी ।
देर नगारो⁴ मीराँ चढ गयी, माता हियो मत हारो जी ।
बागा मे बोली कोयली, बन मे दादुर मोर ।
मीराँ ने गिरिधर मिलिया जी, र्नागर नन्द किशोर ॥७॥†
उपर्युक्त पद से यह अज्ञात ही रह जाता है कि ऐसी दृढ अभि-
व्यक्ति किसके प्रति हुई ? बहुत सम्भव है कि यह हरिदास दर्जी
नामक कोई "रैदासी" सत ही मीराँ के गुरु "रैदास" हों ।
८
कोई कछु कहो रे रग॰लाग्यो, रगलाग्यो भ्रम भाग्यो ।
लोग कहैं मीराँ भई बावरी, भ्रम दूनी ने खा गयो ।
कोई कहै रग लाग्यो ।-
मीराँ साधा मे यूँ रम बैठी, ज्यूँ गूदड़ी मे तागो ।
सोने मैं सुहागो ।
मीराँ सूती अपने भवन में, सतगुरु आय जगा गयो ।
ज्ञानी गुरु आय जगा गयो ॥८॥†
९
थांने बरज बरज मैं हारी, भाभी मानो बात हमारी ।
राणे रोस कियो था ऊपर, साधो मे मत जारी ।
कुल को दाग लगै छे भाभी, निन्दा हो रही भारी ।
साधो रे सग बन बन भटको, लाज गमाई सारी ।
बड़ा घरां मे जन्म लियो छे, नाचो दै दै तारी ।
बर पायो हिंदुवाणै सूरज, अब बिदल मे काई धारी ।
मीराँ गिरधर साध सग तज, चलो हमारे लारी ।
१ खडाऊ या चप्पल, २ दबावेगी, ३ डंके की चोट,