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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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मतभेद • ६
वार्तालाप किस विशेष व्यक्ति से हो रहा है। पहले पद (न० ४) के दूसरे
पाठ से वार्तालाप का किसी ननद के साथ होना और दूसरे पद (न० ५)
से वार्तालाप का किसी सखी के साथ होना ही स्पष्ट होता है। साथ ही
इस पद (न० ५) की कुछ अपनी विशेषताएँ भी हैं। पदाभिव्यक्ति
से स्पष्ट है कि मीराँ का विरोध न केवल गोर-पूजा से है अपितु
राणा के साथ निश्चित किए गए विवाह से भी है। परन्तु इस
विरोध के बावजूद भी मीराँ का विवाह हो जाता है। चित्तौड़ पहुँच
कर भी मीराँ राणा की कुल परम्पराओ को स्वीकार नही करती।
अत विष देने की योजना की जाती है। इस योजना मे निष्फल
हो राणा प्रायश्चित करते है तथा मीराँ के गुरु को जानने की
इच्छा प्रकट करते है। यह “रैदास” कौन हो सकते हैं ? मीराँ
द्वारा बार बार “रैदास” को अपना गुरु बताना भी एक अत्यन्त
विचारणीय प्रश्न है।
६
दे माई म्हाको गिरधर लाल।
थारे चरणा की आनि करत हो, और न मणि लाल ।
नात सगो परिवारो सारो, मने लागे मानो काल ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, छबि लखि भई निहाल ॥६॥†
उपर्युक्त पद प्रियादास कृत “भक्तमाल” की टीका मे आए उद्धरण
का ही गेय-रूपान्तर मात्र सिद्ध होता है।
७
मीराँ ए ज्ञान धरम की गाठडी, हीरा रतन जडाओ जी ।
लोग थांरी निन्दरा करे, साधा मे मत जाओ जी ।
कुण गुरु समझायो, घर को धन्धो छोडद्यो जी ।
लोग थारी निन्दरा करे, साधा मे मत जाओ जी ।
कने कहोगी बाई माइडी, कणे कहोगी बाई बीरो जी ?
कूण थारा पगलिया चापसी, कूण बूझे मन री बात ?
बुढी टेढी म्हांरी मायडी, बीरा भर्यो ससार ।