मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमतभेद ११
मीराँ : मीराँ बात नही जग छानी, ऊदाँ समझो सुघर संयानी ।
साधू मात पिता मेरे, सजन सनेही ग्यानी ।
सत चरण की सरण रैण दिन, सत्त कहत हू बानी ।
राणा ने समझाओ जाओ, मै तो बात न मानी ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, सता हाथ बिकानी ।
ऊदाँ . भाभी ' बोलो बात बिचारी* ।
साधो की संगति दुख भारी, मानो बात हमारी ।
छापा तिलक गलहार उतारो, पहिरो हार हजारी ।
रतन जडित पहिरो आभूषण, भोगो भोग अपारी ।
मीराँ जी थे चालो महल मे, थाँनें सोगन म्हांरी ।
मीराँ. 'भाव भगत भूषण सजे, सील सतो सिंगार ।
ओढी चूनर प्रेम की, म्हारो गिरधर जी भरतार ।
ऊदाँ बाई मन समझ, जाओ अपने धाम ।
राज पाट भोगो तुम ही, हमसे न तासू काम ॥९॥
१०
म्हांरी बात जगत सूँ छानी, साधा सूँ नही छानी री ।
साधू मात पिता कुल मेरे, साधू निरमल ग्यानी री ।
राणा ने समझाओ बाई, (ऊदाँ) मै तो एक न मानी री ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, सतन हाथ बिकानी री ॥१०॥†
इस पद को स्वतन्त्र पद न मानकर पद स. ७ की ही कुछ पंक्तियो
“मीराँ गिरिधर ˙ ˙ हाथ बिकानी” का ही गेय रूपान्तर मानना
अधिक युक्ति-सगत प्रतीत होता है। प्रथम पंक्ति के सिवा अन्य
पंक्तियों पर ब्रजभाषा की छाप स्पष्ट है।