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सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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पृष्ठ 17

८ मलूकदासजी की बानी
भक्त महिमा
॥ शब्द १ ॥
सोई सहर सुबस बसे, जहँ हरि के दासा ।
दरस किये सुख पाइये, पूजै मन आसा ॥ १ ॥
साकट के घर साधजन, सुपने नहिं जाहीं ।
तेइ तेइ नगर उजाड़ हैं, जहँ साधू नाहीं ॥ २ ॥
मूरत पूजैं बहुत मति, नित नाम पुकारैं ।
कोटि कसाई तुल्य हैं, जो आतम मारैं ॥ ३ ॥
पर दुख दुखिया भक्त है, सो रामहिं प्यारा ।
एक पलक प्रभु आप तें, नहिं राखैं न्यारा ॥ ४ ॥
दीन-बंधु करुना-मयी, ऐसे रघुराजा ।
कहैं मलूक जन आपने को, कौन निवाजा ॥ ५ ॥
॥ शब्द २ ॥
देव पितर मेरे हरि के दास । गाजत हौं तिन के बिस्वास ॥ १ ॥
साधू जन पूजौं चित लाई । जिनके दरसन हिया जुड़ाई ॥ २ ॥
चरन पखारत होइ अनंदा । जन्म जन्म के काटे फंदा ॥ ३ ॥
भाव भक्ति करते निस्काम । निसि दिन सुमिरैं केवल राम ॥ ४ ॥
घर बन का उनके भय नाहीं । ज्यों पुरइनि रहता जल माहीं ॥ ५ ॥
भूत परेतन दैंव बहाई । देवखर लीपै मोर बलाई ॥ ६ ॥
बस्तु अनूठी संतन लाऊँ । कहैं मलूक सब भर्म नसाऊँ ॥ ७ ॥
मन और माया के चरित्र
॥ शब्द १ ॥
माया काली नागिनी, जिन डसिया सब संसार हो ॥ टेक ॥
इन्द्र डसा ब्रह्मा डसा, डसिया नारद ब्यास ।
बात कहत सिव को डसा, जेहि घरि एक१ बैठे पास हो ॥ १ ॥
(१) घड़ी भर।