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सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

बिनती ५
बिनती
॥ शब्द १ ॥
अब तेरी सरन आयो राम ॥ १ ॥
जबै सुनिया साध के मुख, पतित - पावन नाम ॥ २ ॥
यही जान पुकार कीन्ही, अति सतायो काम ॥ ३ ॥
बिषय सेती भयो आजिज१, कह मलूक गुलाम ॥ ४ ॥
॥ शब्द २ ॥
साँचा तू गोपाल, साँच तेरा नाम है।
जहवाँ सुमिरन होय, धन्य सो ठाम है ॥ १ ॥
साँचा तेरा भक्त, जो तुझको जानता।
तीन लोक को राज, मनै नहिं आनता ॥ २ ॥
झूठा नाता छोड़ि, तुझे लव लाइया।
सुमिरि तिहारो नाम, परम पद पाइया ॥ ३ ॥
जिन यह लाहा२ पायो, यह जग आइ कै।
उतरि गयो भव पार, तेरो गुन गाइ कै ॥ ४ ॥
तुही मातु तुही पिता, तुही हितु बंधु है।
कहत मलूकादास, बिना तुझ धुंध३ है ॥ ५ ॥
॥ शब्द ३ ॥
एक तुम्हें प्रभु चाहौं राज ॥ टेक ॥
भूपति रंक सेंति४ नहिं पूछों, चरन तुम्हार सँवारयो काज ॥१॥
पाँचो पंडव जरत उबारयो, द्रुपद सुता को राख्यो लाज ॥२॥
संत - बिरोधी ऐसो मारो, ज्यों तीतर पर छूटे बाज ॥३॥
तुम्हें छोड़ि जाने जो दूजा, तेहि पापी पर परिहै गाज ॥४॥
कहैं मलूक मेरो प्रान रमइया, तीन लोक ऊपर सिरताज ॥५॥
(१) लाचार। (२) लाभ । (३) अँधियारा । (४) मुफ्त ।