मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभेद बानी ३
॥ शब्द ५ ॥
सदा सोहागिन नारि सो, जा के राम भतारा।
मुख माँगे सुख देत हैं, जगजीवन प्यारा ॥ १ ॥
कबहुँ न चढ़ै रँडपुरा१, जानै सब कोई।
अजर अमर अबिनासिया, ता को नास न होई ॥ २ ॥
नर देंही दिन दोय की, सुन गुरजन मेरी।
क्या ऐसों का नेहरा, मुए बिपति घनेरी ॥ ३ ॥
ना उपजै ना बीनसे, संतन सुखदाई।
कहैं मलूक यह जानि के, मैं प्रीति लगाई ॥ ४ ॥
॥ शब्द ६ ॥
नैया मेरी नोके चलने लागी।
आँधी मेंह तनिक नहिं डोलै, साहु चढ़े बड़भागी ॥ १ ॥
रामराय डगमगी छोड़ाई, निर्भय कड़िया२ लैया।
गुन लहासि की हाजत३ नाहीं, आछा साज बनैया ॥ २ ॥
अवसर पड़े तो पर्वत बोझै, तँहूँ न होवै भारी।
धन सतगुरु यह जुगत बताई, तिन को मैं बलिहारी ॥ ३ ॥
सूखे पड़े तो कछु डर नाहीं, ना गहिरे का संसा।
उलटि जाय तो बार न बाँकै, या का अजब तमासा ॥ ४ ॥
कहत मलूक जो बिन सिर खेवै, सो यह रूप बखानै।
या नैया की अजब कथा, कोइ बिरला केवट जानै ॥ ५ ॥
भेद बानी
॥ शब्द १ ॥
मुरसिद मेरा दिल दरियाई, दिल गहि अंदर खोजा।
जा अंदर में सत्तर काबा, मक्का तीसो रोजा ॥ १ ॥
सातो तबक औलिया जा में, भेद न होय जुदाई।
सम्स कमर४ ठाढ़े निमाज में, दरसै जहाँ खोदाई ॥ २ ॥
(१) रँडापा। (२) डाँड़ा। (३) ज़रूरत। (४) सूरज और चाँद।