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सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 268 में से

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पृष्ठ 64

( ४८ ) लीलावती ।
अन्यदुदाहरणम्-
इष्टकर्मके विषयमें और उदाहरण-
हारस्तारस्तरुण्या निधुवनकलहे मौक्तिकानां विशीर्णो
भूमौ यातस्त्रिभागः शयनतलगBackतः पञ्चमांशोऽस्य दृष्टः ॥
प्राप्तः षष्ठः सुकेश्या गणक दशमकः संगृहीतः प्रियेण
दृष्टं षट्कं च सूत्रे कथय कतिपयैर्मौक्तिकैरेष हारः ॥ ३ ॥
अन्वयः-हे गणक ! निधुवनकलहे तरुण्याः मौक्तिकानां तारः हारः विशीर्णः ।
ततः त्रिभागः भूमौ यातः । अस्य पञ्चमांशः शयनतलगBackतः दृष्टः । षष्ठः सुकेश्या प्राप्तः ।
दशमकः प्रियेण संगृहीतः । षट्कं सूत्रे दृष्टम् । तर्हि कतिपयैः मौक्तिकैः एष हारः
निर्मितः इति त्वं कथय ॥ ३ ॥
अर्थः-हे गणक ! मैथुनके झगडेमें किसी बालाका मोतियोंका हार टूट गया,
उसमें मोतियोंका तीसरा भाग तौ सामने पृथवीमें गिरा और पांचवां भाग
शय्याके नीचे लुढक गया ऐसा देखनेमें आया और छठा ६ भाग उसी श्यामाने
बीन लिया तथा दशवां भाग पतिने बीना. और छ ६ मुक्ता सूत्रमें रह गये तो
कहो कितने मोतियोंका वह हार बनाया गया था ? ॥ ३ ॥
अत्रेष्टराशिं प्रकल्प्य प्राग्वज्जातो राशिः ३० ॥ इदं क्षेपकम् ॥
फैलाव-यहाँ १/३ १/५ १/६ १/१० दृश्य ६ पूर्वोक्त नियमके अनुसार सवर्णन करने
के अर्थ समच्छेद किया १/३=३/१५=३/१८=३/३०=५/१५=३/१५=१५/९०=१५/१५०=३०/९०=१८/९०=१५/९०=९/९०=
३००/९००+१८०/९००+१५०/९००+९०/९०० तब ऐसा रूप हुआ. अब सब अंशोंको जोडा तब
७२०/९०० ऐसा रूप हुआ यहां बारह १२ का अपवर्तन दिया तब ६०/७५ फिर पंद्रह १५
का अपवर्तन दिया तब ४/५ ऐसा रूप हुआ. इसे मोतियोंकी राशि एकमें
घटाया तब ५/५ १/१-४/५=५-४/५ ऐसा रूप हुआ. इसका इष्ट १ एकसे गुणित दृष्ट
६ छ में भाग दिया तब ६/१ ६/१-५/१ ६/५- ३० लब्धि हुआ. यही १०
हारके मोतियोंकी संख्या है. क्योंकि तीस ३० में से तीसरा भाग ६
अर्थात् दश १० तो पृथिवीमें गिरे और पांचवाँ भाग अर्थात् ६ छ ५
मोती शय्याके नीचे गिरे और छठवां भाग अर्थात् ५ पाँच मोती ३
बालाने बीने और दशवां भाग अर्थात् तीन मोती पतिने बीने और ६
छ ६ डोरेमें रह गये. सबको जोडा तब वही तीस मोती हुए ॥ ३०
यह क्षेपक श्लोक है ॥