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सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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पृष्ठ 65

शेषजातिप्रकारः। (४९)
अथ शेषजात्युदाहरणम्-
इष्टकर्ममें शेषजाति कहते हैं ।
स्वार्द्धं प्रादात्प्रयागे नवलवयुगलं योऽवशेषाच्च काश्यां
शेषांघ्रिः शुल्कहेतोः पथि दशमलवान्षट् च शेषाद्गयायाम् ॥
शिष्टा निष्कत्रिषष्टिर्निजगृहम नया तीर्थपान्थः प्रयात:
तस्य द्रव्यप्रमाणं वद यदि भवता शेषजातिः श्रुतास्ति ॥ ४ ॥
अन्वयः- हे मित्र ! यदि भवता शेषजातिः श्रुता अस्ति तदा यः कश्चित् तीर्थ-
पान्थः धनात् अर्द्धं प्रयागे प्रादात् । अवशेषात् नवलवयुगलं काश्यां प्रादात् ।
शेषांघ्रिः पथि शुल्कहेतोः प्रादात् । शेषात् षट् दशमलवान् च गयायां प्रादात् ।
तथापि निष्कत्रिषष्टिः शिष्टा । अनया निजगृहं प्रयात: । तर्हि तस्य द्रव्यप्रमाणं
वद ॥ ४ ॥
अर्थः-हे मित्र ! यदि तुम इष्ट कर्म्ममें शेषजाति जानते हो तो यह बताओ कि यदि
किसी तीर्थयात्रा करनेवालेने अपने धनमेंसे आधा १/२ प्रयागमें दे दिया, शेषमेंसे द्वि-
गुणित नवम भाग २/९ काशीजीमें दे दिया, फिर जो शेष रहा उसमेंसे चौथा १/४ भाग
मार्गमें किरायेका दे दिया, तब जो शेष रहा उसमेंसे छ ६ गुणित दशम ६/१० भाग
गयाजीमें दे दिया तब भी ६३ तिरसठ निष्क बच रहे उनको खर्च करके अपने
घर पहुँच गया तो कहो उस यात्रीके पास सब रुपया कितना था ? ॥ ४ ॥
न्यासः-- १/२, २/९, १/४, ६/१० दृश्यम् ६३ अत्र रूपं १ राशिं प्रकल्प्य
भागान्शेषान् शेषादपास्य अथवा
भागापवाहविधिना भागानयनेन
सवर्णितं जातम् ७/६०
अनेन दृष्टे ६३ इष्टगुणिते भक्त जातं द्रव्यप्रमाणम् ५४०
इदं विलोमसूत्रेणापि सिद्धयति ॥
फैलाव-यहाँ राशि १ एक कल्पना किया उसमें इन सब भागोंको क्रमसे
अर्थात् पहले १ एकमें आधा, फिर उस आधेमें द्विगुणित अपना
नवम भाग घटाया फिर जो शेष रहा उसमें अपना चौथा भाग
घटाया, जो शेष रहा उसमें अपना छ ६ से गुणित दशम भाग घटाया
अथवा भागापवाहकी विधिसे सवर्णन किया तब ७/६० सातके नीचे
साठ हर हुआ, उसका इष्टसे गुणा किये हुए ६३ में भाग लिया
४