लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदृष्टजातिप्रकारः। ( ४७ )
अपरोदाहरणम्-
इष्टकर्मके ही विषयमें तीसरा उदाहरण.
अमलकमलराशेर्यंशपञ्चांशषष्ठैः
त्रिनयनहरिसूर्या येन तुर्येण चार्य्या ॥
गुरुपदमथ षड्भिः पूजितं शेषपद्मैः
सकलकमलसंख्यां क्षिप्रमाख्याहि तस्य ॥ २ ॥
अन्वयः-हे मित्र ! येन अमलकमलराशेः त्र्यंशपंचांशषष्ठैः त्रिनयनहरिसूर्याः
पूजिताः । तुर्येण च आर्य्या पूजिता । अथ षड्भिः शेषपद्मैः गुरुपदं पूजितम् ।
तस्य सकलकमलसंख्यां क्षिप्रम् आख्याहि ॥ २ ॥
अर्थः- हे मित्र ! जिसने सुन्दर कमलोंकी राशिमेंसे तीसरे भागसे शिवजीका,
पांचवें भागसे विष्णुका और छठे भागसे सूर्यका तथा चौथे भागसे देवीका पूजन
किया और बाकी किये हुए छ कमलोंसे गुरुके चरणारविंदोंका पूजन किया
तब कहो कि उसके सब कमलोंकी क्या संख्या थी ? ॥ २ ॥
न्यासः-- १/३ १/५ १/६ १/४ दृश्यम् ६ ।
अत्रेष्टराशिं १ प्रकल्प्य प्राग्वज्जातो राशिः १२०
फैलाव-यहां उपरोक्त नियमके अनुसार १/३ १/५ १/६ १/४ इन सबका सवर्णन
करनेके वास्ते समच्छेद किया तब १/३ ३/१५ ३/१८ ३/१२, १/५ ३/१५, १/६ ३/१८, १/४ ३/१२, १५/६० १५/६० ३०/९० १८/९०
१५/६० ९०/३६० = १२०/३६० ७२/३६० ६०/३६० ९०/३६० ऐसा हुआ. सब अंशोंका जोड दिया।
तब ३४२/३६० ऐसा रूप हुआ. यहां छ ६ का परिवर्तन दिया तब ५७/६० ऐसा रूप
हुआ. इसको राशि कमलोंकी १ एकमें घटाया तब ५७/६० १/१ = ५७/६० ६०/६० = ३/६० तीनके
नीचे ६० साठ हर शेष हुआ इसमें तीनका परिवर्तन दिया तब १/२० ऐसा रूप
हुआ. इसका इष्टराशि १ से गुणित दृश्य ६ में भाग दिया तब १/० : ६/१ = २०/१ : ६/१
ऐसा रूप हुआ. अंशोंको परस्पर गुणा किया तब १२० लब्धि हुआ. यही कमलों
की वह राशि है, कि जिसमेंसे सर्वत्र पूजन कियाथा क्यों कि राशिका |
तीसरा भाग अर्थात् ४० चालीस कमल शिवजीको चढाये और | ४०
पांचवें भाग अर्थात् २४ चौबीस कमलोंसे विष्णुभगवानका पूजन | २४
किया और छठे भाग अर्थात् २० बीस कमलोंसे सूर्यका पूजन किया | २०
और चौथा भाग अर्थात् ३० तीस कमलोंसे दुर्गाका पूजन किया. | ३०
बाकी छ ६ कमलोंसे गुरुजीका पूजन किया तब सबको जोडा तब | ६
वही १२० राशि हुआ ॥ | -------
| १२०