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सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 268 में से

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( ४६ ) लीलावती ।
अर्थ:-हे मित्र ! हाथियोंका एक समूह था. उसमेंसे अपने तृतीयांशसहित आधा
| १/२ / ३ | तो वनकी गुफामें जाता हुआ हमने देखा और सात ७ वें भाग करके सहित
| १/६ / ७ | छठा भागभी | १/६ / ७ | नदीमें जल पीता था और अपने नवम भाग करके सहित
आठवां भाग | १/८ / ९ | भी कमलोंसेभर हुए तालावमें जल पीता था
और ३ तीन हाथिनियोंके साथ १ एक गजराज बडे आनन्दसे क्रीडा करता था तो
कहो सब हाथियोंकी क्या संख्या हुई ? ॥ १ ॥
न्यास:- १/२ ६ ६ दृश्यम् ४
— — —
एषां सवर्णनं द्वाभ्यामपवर्तितम् - २१ ५/३६
पुनरेषां सवर्णनं नवभिरपवर्तितम् २५१/२५२
इदमिष्टराशेः शोधितम् १/२५२
अनेन दृष्टे ४ इष्टगुणिते भक्ते जाता हस्तिसंख्या १००८
फैलाव-उपरोक्त रीतिके अनुसार | १/२ / ३ | | १/६ / ७ | | १/८ / ९ | इन सब राशियोंको भागानुबन्धकी
रीतिसे सवर्णन किया तब १/२ ४/३ १/६ ८/७ १/८ १०/९ ऐसा रूप हुआ. यहां
दो २ का अपवर्तन दिया तब २/३ ४/२१ ५/३६ ऐसा रूप हुआ. इसको समच्छेद
२/३ ४/२१ ५/३६ = ५२/६३ ५२/६३ २२६८ = १५१२/२२६८ ४३२/२२६८ ३१५/२२६८ करके जोडा तब २२५९/२२६८
ऐसा रूप हुआ. फिर ९ नौका परिवर्तन दिया तब २५१/२५२ ऐसा रूप हुआ. अब
यूथसंख्या एकमें घटाया तब २५१/२५२ १/१ = २५१/२५२ २५२/२५२ = १/२५२ ऐसा रूप हुआ तब इष्ट
१ एकसे गुणित दृश्य ४ चारमें इसका भाग लिया तब २५२ ४/१ = २५२ ४/१ = १००८
एक हजार आठ हुआ. यही हस्तियोंके यूथकी संख्या है. क्योंकि अपने तृतीयांश
सहित आधा ६७२ अर्थात् | ६७२ | छःसौ बहत्तर तो वनकी गुफामें और सप्तम
भाग सहित छठा | १९२ | भाग अर्थात् १९२ एकसौ बानवे नदीमें जल
पीता था और नवम | १४० | भाग सहित आठवां भाग १४० अर्थात् एकसौ
चालीस कमलोंके | ४ |
| १००८ |
तालाबमें जल पीता था और तीन हस्तिनियोंके सङ्ग एक हस्ती, अर्थात् चार ४
क्रीडा करते थे. सबको जोडा तब वही एक हजार आठ १००८ हुए ॥ यह
क्षेपक श्लोक है.