ललिता सहस्रनाम: सौभाग्यभास्कर भाष्य (भास्करराय मखी प्रणीत मूर्धन्य शाक्त भाष्य)
Lalita Sahasranama with Saubhagya Bhaskara Commentary
भास्करराय मखी (सम्पादक: वासुदेव लक्ष्मण पणशीकर) द्वारा
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Wait, if it's "सौम्येत्यादिद्विपाठे", let's transcribe it as "सौम्येत्यादिद्विपाठे" or "सौम्येत्याद्विद्विपाठे"?
Wait, look at the prompt: "transcribe the text line by line into pure, clean Markdown in Unicode Devanagari".
If it's "सौम्येत्यादिद्विपाठे", let's look at line 22:
'सौ' 'म्ये' 'त्या' 'दि' 'द्वि' 'पा' 'ठे'
Yes, 'दि' followed by 'द्वि'!
Wait, is the first one 'दि'?
Yes, the vertical part goes down to the baseline, standard for 'दि'. The second one has 'द्वि'.
So: "सौम्येत्यादिद्विपाठे तु चातुर्वर्ण्यादित्वात्स्वार्थे ष्यञ् ।"
Line 23:
श्यामलाशुद्धविद्याश्वारूढादिरूपेत्यर्थः ॥ २१९ ॥ सव्यश्चापसव्यश्च मार्गश्च सव्यापसव्य-
Line 24:
मार्गास्तेषु स्थिताधिकृता । वितरणपालनाधिकारादिदानक्षमेति यावत् । तेषां त्रयाणां
Line 25:
स्था स्थितिर्यस्यामिति वा । सन्ति हि सवितृमण्डलस्योत्तर-दक्षिण-मध्य-भागभेदेन
Line 26: