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सर्वकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 268 में से

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पृष्ठ 120

( १०१ )
अर्थ and काम, but devoted herself solely to the acqui-
sition of धर्म । एक एव—i e, धर्म एव । प्रतिगृह्य—( प्रति +
√ग्रह् +ल्यप् ) स्वीकृत्य having accepted or selected. सेव्यते
—आश्रीयते is followed 38
CHANGE OF VOICE :—( हे ) भाविनि, अनेन अद्य मे धर्मेण
सविशेषं त्रिवर्गसारेण प्रतिभायते, यत् मनोनिर्विषयार्थकामा त्वं
एकं एव प्रतिगृह्य सेवसे ॥ ३८ ॥
HINDI TRANSLATION :—हे श्रेष्ठ अभिप्राय वाली, इससे तो
आज मुझे धर्म ही विशेषतया तीनो वस्तुओ ( धर्म, अर्थ, काम )
में श्रेष्ठ ज्ञात होता है, क्योंकि अर्थ और काम से रहित मन वाली
तुम ( उसी ) एक को ग्रहण कर पालती हो ॥ ३८ ॥
ENGLISH TRANSLATION —O one of noble intentions,
on account of this ( thy conduct ) Dharma strikes me
pre-eminently as the best of the group of the three
( viz., Dharma, Artha and Káma ), since this only has
been selected and followed by thee, whose mind is
free from all thoughts of Artha ( wealth ) and Káma
( desire ) 38
PURPORT IN SANSKRIT :—हे श्रेष्ठाभिप्रायवति पार्वति !
यतस्त्वं बुद्धिमती धर्मार्थकामानां वर्गे अर्थकामावनादृत्य एकं धर्म-
मेव कल्याणकरं स्वीकृत्य पालयसि अतोऽहमद्य त्वदाचरणं दृष्ट्वा
मन्ये यदेषां त्रयाणां समूहे धर्म एव श्रेष्ठतम , अर्थकामानुसारिणी
च लोकानां प्रवृत्तिरनुचिता ॥ ३८ ॥
प्रयुक्तसत्कारविशेषमात्मना
न.मां परं संप्रतिपत्तुमर्हसि ।