क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)
Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics
क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा
DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ
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१६४ क्षेमकुतूहलम्
सर्षप शाक
क. विधि- सर्षप (सरसों) के मृदु (कोमल) पत्र एवं नाल सहित दण्ड को (प्रक्षालन
करके) तक्र में सुस्वित्र करके (उबालते) हैं; इसे पीड़ित (निचोड़कर) पिण्डी बना
लेते हैं, जिसे हिंगु (भृष्ट) को तप्त तैल में, लवण के साथ, भर्जित करते हैं।
सार्षपी कन्दली सूक्ष्मा खण्डिता स्निग्धभाजने।
स्थापिता मण्डसहिता त्वथवा तण्डुलोदकैः॥ १८८॥
समरात्रात्परं चुक्रतुल्यं सम्यक्प्रजायते।
तत एव समाकृष्य तलयेद्वा प्रलेहयेत्॥ १८९॥
काप्यकेति समाख्याता सूदधर्मोपजीवकैः।
सार्षपं कटुतीक्ष्णोष्णं वातश्लेष्मव्रणापहम्॥ १९०॥
कृमिकण्डूहरं दद्रुकुष्ठघ्नं रुचिकारकम्।
सर्षप कन्दली
सर्