क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)
Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics
क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा
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ऋतूनां लक्षणं ज्ञात्वा ततस्तद्विधिमाचरेत् ।
अत एव प्रवक्तव्यं तच्चिह्नं तद्धिताहितम् ॥ ५२ ॥
अन्न का गुणानगुण
ऋतु के अनुसार तथा विधिपूर्वक पक्व अन्न प्राणियों का जीवन है। आहार विधि
विरुद्ध अन्न का सेवन परिणाम में विष के समान होते है।
ऋतुओं के लक्षण जानकर, आहार विधि के अनुसार आचरण करें, तथा ऋतुओं
के हिताहित का विचार करते हुए, आहार का सेवन करना श्रेयस्कर है॥५१-५२॥
अथ चतुर्थोत्सवः
(प्रकरण चतुर्थ)
ऋतुभेदाः
शिशिरः पुष्पसमयो ग्रीष्मो वर्षा शरद्धिम्ः ।
माघादिमासयुग्मैः स्युर्ऋतवःषट् क्रमादिमे ॥ १ ॥
उत्तरायणमाद्यैस्तैरन्यै स्याद्दक्षिणायनम् ।
आद्यमुष्णं बलहरं तत्रान्यद्बलदं हिमम् ॥ २ ॥
ऋतुओं का चक्र
ऋतु मास
१. शिशिर माघ-फाल्गुन
२. वसन्त चैत्र-वैशाख
३. ग्रीष्म ज्येष्ठ-आषाण
४. वर्षा श्रावण-भाद्रपद
५. शरत् आश्विन-कार्तिक
६. हेमन्त मार्गशीर्ष-पौष
उत्तरायण काल- शिशिर, वसन्त एवं ग्रीष्म - उष्ण, बलहारक
दक्षिणायन काल- वर्षा, शरद एवं हेमन्त - शीतल, बलदायक
तुषारजालैः पिहितानि यत्र सवाष्पनीराणि मुखानि भानुः।
प्रातः प्रसन्नानि करैः करोति दिशां वधूनामिव खण्डितानाम् ॥ ३ ॥
प्रियङ्गुपुन्नागकरोध्रेणुर्ब्रजर्नभो वाति हिमार्द्रवायुः।
आच्छादयन् धूमवितानलीढं विद्यादृतुं तं हिमनामधेयम् ॥ ४ ॥
हेमन्त ऋतु- लक्षण
तुषार कणों से आवृत्त, वाष्प-जलयुक्त दिशाओं से मुख को प्रातःकाल किरणो