क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)
Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics
क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ | क्षेमकुतूहलम्
अथ सुपक्वआम्रफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
सुपक्वमाम्रस्य फलं सुमुष्टिना
संमर्दितं शर्करया समन्वितम्।
एलालवङ्गार्द्रकवासवासितं
वर्णान्वितं कस्यन रोचकप्रदम्॥५४॥
पानकं त्वाभ्रसंभूतं स्वाद्वम्लं गुरु पित्तजित्।
सुहृद्यं श्लेष्मकृद्वल्यं वर्ण्यंवृष्यं रुचिप्रदम्॥५५॥
सुपक्वआम्रफल पानक
क. विधि- सुपक्व आम्र फल (भलीभाँति/ पूरे तरह पके) को अपनी मुट्ठी
(स्वमुष्टित्वा) मर्दन करके, शर्करा का मिश्रण करें, एला, लवंग तथा आर्द्रक की
सुगन्ध से सुवासित करें।
इस रीति से वर्णयुक्त पानक किसको रुचिकारक नहीं होता- यह पानक
सर्वप्रिय-स्वाद जनक होता है।
ख. गुण- १. स्वादु २. अम्ल
३. गुरु ४. पित्तजित्
५. सुहृद्य ६. श्लेष्मकृत
७. बल्य ८. वर्ण्य
९. वृष्य १०. रुचिप्रद
अथाम्लिकाफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
अम्लिकायाः फलं पक्वं मर्दितं वारिणा दृढम्।
शर्करामरिचोन्मिश्रं लवङ्गेनाधिवासितम्॥५६॥
अम्लिका फल पानक- १
चिंचा (अम्लिका) के पूर्णपक्व फलों का जल में डालकर मर्दन करके, शर्कर
एवं मरिच चूर्ण- साथ ही लवंग चूर्ण सुगन्धित बनाने हेतु-मिश्रित कर देते हैं। इसे
'अम्लिका पानक' कहते हैं।
चान्त्रेयं शर्करायुक्तं कर्पूरोदकमर्दितम्।
फलमार्द्रकसंयुक्तं प्राह तत्पानकान्तरम्॥५७॥
द्वादशोत्सवः २४७
अम्लिका फल पानक- २
अम्लिका फल को जल में मर्दन करके, शर्करा तथा कर्पूर मिश्रित कर, आर्द्रक
स्वरस जल देते हैं।
अम्लिकाफलसंभूतं पानकं वातनाशनम्।
कफपित्तकरं किञ्चित्सुरुच्यं वह्निबोधकम्॥५८॥
ख. गुण- १. वातनाशक २. किंचित् कफ कारक
३. किंचित् पित्त जनक ४. रुचिकारक
५. वह्निबोधक (अग्नि तीव्र कर)
अथ जम्बूफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
जम्बूफलं त्वस्थिविवर्जितं हि
सुमर्दितं शर्करयाऽम्बुनाऽलम्।
सुवासितं वल्लिजभृङ्गपत्रै
रुचिं विधत्ते विरुचौ जनानाम्॥५९॥
जम्बूफलभवं रुच्यं पानकं कफनाशनम्।
कषायं वातकृत्स्तोकं स्वाद्वम्लं ग्राहिकं वरम्॥६०॥
जम्बूफल पानक
क. विधि- जम्बूफल (अस्थि रहित) को जल में मर्दन करके, शर्करा मिश्रित कर
दें, फिर मरिच, भृंग (त्वक-दालचीनी) तथा पत्र (तेजपत्र) का चूर्ण डालकर
सुगन्धित करें। यह 'जम्बूफलपानक' निर्माण हो गया है।
यह पानक (जम्बूफल पानक) व्यक्तियों की अरुचि विकार को नष्ट करके, रुचि
उत्पन्न कर देता है।
ख. गुण- १. रुच्य २. कफनाशन
३. कषाय ४. किंचित् वातनाशक
५. स्वादु ६. अम्ल
७. ग्राही (वरम्)
अथ बीजपूरपाननिर्माणविधिर्गुणाश्च
मातुलुङ्गरसे योज्यं त्रिगुणं शार्करं जलम्।
कर्पूरमरिचोन्मिश्रं पानकं स्यादिदं वरम्॥६१॥