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सर्वकोश
क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics

क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा

DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ

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पृष्ठ 127

मातुलुङ्गभवं पानं शूलाजीर्णविनाशनम्।
श्वासकासारुचौ वातविड़बन्धेषु च पूजितम्॥ ६२॥
बीजपूर पानक
क. विधि- बीजर (बीजौरा-विजौरा नीबू) या मातुलय के स्वरस में उससे त्रिगुण
जल में शर्करा (मात्रपूर्वक) मिला दें इसे कर्पूर तथा मरिच चूर्ण से सुगन्धित करें।
ख. गुण- १. शूल २. अजीर्ण
३. श्वासवृद्धि ४. कास
५. अरुचि ६. वातवरोध
७. मलावरोध (नाशक-१-७)
अथ हेमकिरणपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
शर्करा नालिकेरं च बीजपूररसप्लुतम्।
पटपूतं भवेद्धमकिरणं नाम पानकम्॥ ६३॥
पानकं हेमकिरणं रुच्यं वृष्यं बलप्रदम्।
सुस्निग्धं वातहच्छुभ्रं किञ्चित्कफकरं गुरु॥ ६४॥
क. विधि- शर्करा, नालिकेर जल तथा बीजपूर स्वरस मिश्रण को, पटपूत करके
(वस्त्र से छानकर) रखते हैं। इसको 'हेम किरण पानक' संज्ञा दी जाती है।
ख. गुण- १. रुच्य २. वृष्य
३. बल्य ४. स्निग्ध
५. वातनाशक ६. शुभ्र
७. किंचित् कफवर्धक ८. गुरु (गरिष्ठ)
अथ निम्बूफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
भागैकं निम्बुजं तोयं षड्भागं शर्कराेदकम्।
लवङ्गमरिचोन्मिश्रं पानकं पानकोत्तमम्॥ ६५॥
निम्बूफलभवं पानमत्यम्लं वातनाशनम्।
हृद्यं रुचिकरं भव्यं सर्वाहारस्य पाचकम्॥ ६६॥
निम्बूफलपानक
क. विधि- निम्बुज (नीबू का रस) एक भाग, शर्करा मिश्रित जल-छह भाग मिश्रित
कर, लवंग एवं मरिच चूर्ण डालें।
यह उत्तम पानक (पानकोत्तमम्) बन जाता है।
ख. गुण- १. अत्यधिक अम्ल २. वातनाशक
३. हृद्य ४. रुचिकर
५. भव्य (श्रेष्ठ) ६. सर्वाहार पाचक
अथ कारमर्दकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
लवङ्गार्द्रकसंयुक्तं सुपिष्टं वारिणा युतम्।
कारमर्दं करैमर्द समभागसितान्वितम्॥ ६७॥
वातहृद्रुचिदं बल्यं हृद्यमम्लतरं स्मृतम्।
रक्तपित्तकरं चोक्तमकण्ठ्यं कारमर्दकम्॥ ६८॥
कारमर्द पानक
क. विधि- करमर्द (करौंदे-करवन) फलों को जल में सुपिष्ट भलीभाँति पीसकर,
लवंग एवं आर्द्रक के साथ समभाग सिता (शर्करा) कर-मिश्रित तथा गालित
कर (छान) लेते हैं। यह 'करमर्दपानक' प्रस्तुत है।
ख. गुण- १. वातहृत् २. रुचिद
३. बल्य ४. हृद्य
५. अम्लतर ६. समपित्तकर
७. अकण्ठ्य ८. कण्ठ (गल अहितक)
९. आम-पक्व (मधुराम्ल) फलोपयोगी
अथ नारङ्गफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
सुपक्वनारङ्गफलं सुपीड़ितं
संयोजितं शर्करयाऽतिशुभ्रया।
सदार्द्रकं चेन्दुकणेन वासितं
महीतलेकेन न संस्तुतं क्षणम्॥ ६९॥
नारङ्गफलसम्भूतं पानकं वातनाशनम्।
मधुरं विशदं रुच्यं सुस्निग्धं पित्तहृद्गरम्॥ ७०॥
नारङ्गफल पानक
क. विधि- सुपक्व नारंग (नारंगी) फलों को सुपीडितकर (स्वरस निकालने हेतु),