क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)
Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics
क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा
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रसालां रसवद्द्रव्यं मधुरं पित्तनाशनम्।
सुहृद्यं कफकृत्स्तोकं किञ्चिद्विष्टम्भकारकम्॥४७॥
मोचाफल रसाला
क. विधि- निर्नीर (जलरहित) दधि के साथ मोचाफल मथित कर, शर्करा मिलाकर,
मरिच चूर्ण लाती तथा केतकी पुष्प सुगन्धित मृत् भाजन में स्थापित करें। इसका
नाम 'मोचाफल रसाला' है।
यह विशिष्ट रसाला उपक्रम (भोज्य प्रस्तुति) का नाम 'मोचाफल रसाला' है।
ख. गुण- १. बल्य २. मधुर
३. पित्तनाशन ४. सुहृद्य
५. कफकृत् (स्तोक) ६. किंचितविष्टम्भकारकम्
अथ खार्बुजेयं रसालनिर्माणं गुणाश्च
मधुरदधिनो मध्ये शर्करां सन्नियोज्य
शुभविदलितखण्डं प्रक्षिपेत्खार्बुजेयम्।
करविलुलितमानैर्वासितं चातिगन्धै-
र्जिगमिषुजठराग्नि स्थापयत्येव नूनम्॥४८॥
रसालं खार्बुजस्येदं विष्टम्भि रुचिकारकम्।
हृद्यं च कफदं बल्यं पित्तघ्नं मूत्रकृद्धरम्॥४९॥
खार्बुजेय रसाला
क. विधि- मधुर दधि-शर्करा मिश्रित-में खर्बूज खण्ड (खरबूजे के छोटे टुकड़े)
डालकर, हस्त-मर्दन करें तथा सुगन्धित द्रव्यों से सुवासित करते है। इसका नाम
'खार्बुजेय रसाला' है।
यह भृष्ट जाठराग्नि को पुनस्थापित कर देती है।
ख. गुण- १. विष्टम्भि २. रुचिकारक
३. हृद्य ४. कफजनन
५. बल्य ६. पित्तघ्न
७. मूत्रकृत् (उत्तम मशाल) ८. अग्निजनन
द्वादशोत्सवः २४५
अथाम्ररसालानिर्माणं गुणाश्च
सखण्डं खार्बुजं खण्डं चन्द्रार्द्रकविमण्डितम्।
पक्वाम्ररससंयुक्तमत्याराधितवान् रविम्॥५०॥
पक्वाम्ररसखण्डाभ्यां संस्कृतं खार्बुजं दलम्।
वातपित्तहरं सर्वरसालेषूत्तमोत्तमम्॥५१॥
आम्र रसाला
क. विधि- सखण्ड खर्बूज (दल) खण्ड को कर्पूर तथा आर्द्रक से आवृत्त करें तथा
पक्वाम्र रस क्षेपण करते हैं, सूर्यातप में शुष्क करती हैं। इस तरह 'आम्ररसाला'
बन जाती है।
ख. गुण- १. वातघ्न
२. पित्तशामक
३. सर्वोत्तम रसाला (सर्वरसालेषूत्तमोत्तमम्)
अथ पानकानि
अथापक्वाम्रफलपानकनिर्माणविधिर्गुणाश्च
आमाम्रं परिसिन्नं मर्दितं मुष्टिना दृढम्।
पयसाऽर्धयुते तोये शर्करामरिचान्विते॥५२॥
अपक्वाम्ररसोद्भूतं पानकं वातनाशनम्।
कफपित्तकरं किञ्चित् प्रत्यहं यदि सेवितम्॥५३॥
पानक
अपक्वाम्रफल पानक
क. विधि- आम (कच्चे) आम्रफल को परिसिन्न (उबाल) करके, दृष्टि मुष्टि
(मजबूत हाथों की मुट्ठी) से मर्दन करते हैं, फिर इसमें अर्ध दुग्ध मिश्रित
जल में शर्करा एवं मरिच मिला देते हैं। यह 'आम्रफल' पानक तैयार हो
गया।
ख. गुण- १. वातनाशक
२. कफ ] (किंचित वर्धक-प्रत्यहं यदि सेवितम्
३. पित्त ] नित्य या अधिक सेवन करने पर)