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सर्वकोश
क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics

क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा

DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ

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पृष्ठ 116

-ट-मां-शान् क्षि-पेत्-त-त्र (८)
तन्-दु-लांस्-त्रि-त्व-चांस्-ति-लान् (८)
It is indeed "तन्दुलांस्त्रित्वचांस्तिलान्"!

Line 33:
"प्रियालपनसाब्जानां मज्जां मात्रासमां क्षिपेत् ॥ १६ ॥"
प्रि-या-ल-प-न-साब्-जा-नां (८)
मज्-जां मा-त्रा-स-मां क्षि-पेत् (८)

Line 34:
"क्षीरार्धं घृतं चैव शर्करा च तथा न्यसेत्।"
क्षी-रार्र्-धं घृ-तं चै-व (८)
शर्-क-रां च त-था न्य-सेत् (८)
Yes, "शर्करां च तथा न्यसेत्।"

Line 35:
"सिद्धे त्रिकटुकोपेतः कूर्परेणाधिवासितः ॥ १७ ॥"
सिद्-धे त्रि-क-टु-को-पे-तः (८)
कूर्-प-रे-णा-धि-वा-सि-तः (८)

Line 36:
"एष विष्यन्दनो नाम देवलोकेऽपि दुर्लभः।"
ए-ष विष्-यन्-द-नो ना-