कृषि-पाराशर (महर्षि पराशर - प्राचीन भारतीय कृषि, मृदा-परीक्षण, वर्षा-पूर्वानुमान व बीज-संस्कार)
Krishi-Parashara of Maharshi Parashara
महर्षि पराशर (सम्पादक: गिरिजाप्रसन्न मजूमदार एवं सुरेशचन्द्र बनर्जी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकृषिपराशरः ५६
याम्यावर्तेन धान्यानां मापनं व्ययकारकम्।
वामावर्तेन सुखदं धान्यवृद्धिकरं परम् ॥२३९॥
श्लेष्मातकाम्रपुन्नागकृतमाढकमुत्तमम्।
कपित्थपर्कटीनम्बजनितं दैन्यवर्द्धनम् ॥२४०॥
5 अथ धान्यस्थापनम्—
हस्ताहरित्रये पुष्ये रेवत्यां च प्रजापतौ।
यममूलोत्तरे सौम्ये मघायां च पुनर्वसौ ॥२४१॥
जीवे सौम्ये भृगोर्वारे निधने क्रूरवर्जिते।
मीनलग्ने शुभे ऋक्षे धान्यस्थापनमुत्तमम् ॥२४२॥
1 A omits the line.
For B, see Note under footnote 8 on last page.
C दक्षिणावर्त्त for याम्यावर्तेन.
2 Omitted by A. For B, see Note under footnote 8 on last page.
3 Omitted by A and C.
4 Omitted by A and C. D reads—कपित्थनिम्बकण्टकं च वर्जितं
धान्यमापनम्.
5 A अथ स्थापनं धान्यस्य.
6 B, C हस्ते for हस्ता.
B स्वातौ च पुष्यायां for हरि...पुष्ये.
C चित्तद्वये for हरित्रये.
7 A याम्यमूलोत्तराशके ऽनुराधायां for यम...च.
C वारुण्यां चोत्तरे चैव for यम...सौम्ये.
D मित्रमूलोत्तरे शक्रे for the same portion.
8 A, D जीवसौम्य for जीवे सौम्ये. A रवि...(?) विवर्जिते for निधने...
वर्जिते. B सोम for सौम्ये, निधन for निधने. D भृगु: fot भृगोः, निधनं...
(?) for निधने...वर्जिते.
9 D शुक्लपक्षे for शुभे ऋक्षे.