कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
210 Appendix III
सवितृप्रसूततायै । V. 2. ६; VIII. 1. ११; 5. ८; IX. 5. ९.
सवितृप्रसूतस्य ह वै न काचन रिष्टिर्भवत्यरिष्ट्यै । VIII. 1. १२; 5. ९; IX. 5. १०.
स्वर्ग एव तल्लोके यजमानं दधाति । XIV. 3. ३३; XV. 6. ३०; XVIII. 4.
२२.
स्वस्त्ययनमेव तत् कुरुते । III. 2. २; XI. 1. ५.
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VERZEICHNIS DER ORIENTALISCHEN HANDSCHRIFTEN
IN DEUTSCHLAND
IM EINVERNEHMEN MIT DER DEUTSCHEN
MORGENLÄNDISCHEN GESELLSCHAFT HERAUSGEGEBEN VON
WOLFGANG VOIGT
SUPPLEMENTBAND 9,2
KAUṢĪTAKIBRĀHMAṆA
VYĀKHYĀ OF UDAYA
HERAUSGEGEBEN VON
E. R. SREEKRISHNA SARMA
FRANZ STEINER VERLAG GMBH · WIESBADEN
1976
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KAUṢĪTAKIBRĀHMAṆA
2
VYĀKHYĀ
OF
UDAYA
HERAUSGEGEBEN VON
E. R. SREEKRISHNA SARMA
FRANZ STEINER VERLAG GMBH · WIESBADEN
1976
ADDENDUM AND CORRIGENDA TO VOL. 1 ⟨KB⟩
C in the footnotes stands for the Commentary
on KB by Udaya.
CORRIGENDA
I, 1, २ °मृत्युः
I, 1, footnote 2 सतनूः
I, 5, ६ भवत्या पूर्वा°
VII, 12, २० मयोभुव
VIII, 12, १५ अनन्तर्हितो
XI, 8, २३ श्रेष्ठोऽन्वेतोः
XI, 9, ११ योगमा वेद
XII, 2, १४ यदास्त्वैषी°
XIII, 5, ७ युक्ता
XIX, 2, १३ महाव्रती°
XIX, 3, ८ पुरोळाश°
XXVI, 12, footnote 2-2 ऐतीव (omit वा)
APPENDIX IV
VARIANTS IN THE KB TEXT READINGS
ACCORDING TO UDAYA
Passage | Udaya's reading | Variant mentioned by Udaya
II. 6. १० | हैवास्य हुतं | हैवास्योदितं
II. 6. ११ | रात्र्या उ शीर्षन् | रात्र्या उ द्वि शीर्षन्
III. 2. २२ | बसं |
XII. 1. २ | अपोऽच्छ यन्ति | अपो यच्छान्त
XII. 2. २० | ह्यनु स्तौति | हि यतीः स्तौति
XII. 6. ४ | यथादः | अथादः
XII. 6. १४ | स्वरः साम | स्वरसाम
XVIII. 7. | at the end adds : ते वै षड् |
| भवन्ति । षड् वा ऋतवः । |
| ऋतूनेव तत् प्रीणाति । |
XVIII. 8. ११ | अच्युतो | अच्युता
XVIII. 9. २ | omits वषट्कारेषु | वषट्कारेषु
XVIII. 9. ६ | स्तुतौ | स्थित
XIX. 7. १८ | as printed | adds : षळहो वा उ सर्वः संवत्सर इति वदन्तः
XXIII. 1. १७ | विमदन् | व्यमदन्
XXIII. 6. २७ | इति | अथ
XXIII. 9. २ | संवृञ्जीत | संपृञ्चीत
XXIII. 11. ४-६ | as printed | अतिच्छन्दसं For प्राजापत्यं
XXIII. 11. ३१ | उभये | अभये
XXV. 3. २१ | as printed | adds : महादिवाकीर्त्यमेवैतस्याह्नः पृष्ठं स्यादिति त्वेव स्थितम्
XXV. 4, 5, 6, 7 | See the Commentary text pp. 556 to 562 |
XXV. 8. २२ | संस्थापयिषेयुः | संतिष्ठापयिषेयुः
712
Passage Udaya's reading Variant mentioned by
Udaya
XXV. 12. ४-६ omitted तत्राग्निमारुते रौद्रीं शस्त्वा
होतॄवयामरुतं पङ्क्तिशंसं
शंसति। पञ्चपदा पङ्क्तिः।
पाङ्क्तो वै यज्ञो यज्ञस्यैवाप्त्यै।
नेदच्छावाकस्य शिल्पंमन्तरया-
मेति।
XXV. 13. २ omitted प्रतिष्ठा वा अग्निष्टोमः प्रतिष्ठि-
त्या एव।
XXV. 13. ५ विश्वजिता विश्वजितो
XXV. 13. १८ वत्सच्छवीं वत्सच्छवीन्
XXVI. 5. १५ not clear सैवासीदिति
XXVI. 7, 8 अभ्यारभ्य (in all places) अभ्यारब्ध (in all places)
XXVI. 7. ७ अभ्यारभ्य वसन्ति अभ्यारब्धवन्ति स्युः
XXVI. 11. ४ अत्र न्वापि अत्र न्वा अपि
XXVII. 2. १३ नानुष्टुबायतनं रिच्यात् नानुष्टुभ आयतनं रिञ्च्यात्
XXVII. 5. ६, १० यदा, तदा यथा, तथा
XXVII. 5. १३ as printed omitted
XXVII. 9. २० सासावेव सोऽसावेव
XXVIII. 4. १ अङ्गिरोभ्यस्तूपहवम्
XXVIII. 5. २५ as printed इति omitted
XXIX. 1. २६ अधीयाय अपीयाय
XXIX. 5. १५ शिल्पतृचानि तृचानि
XXX. 4. २ as printed जातं omitted
XXX. 5. १४ अभिवदन्ति अभिवदन्तः
XXX. 9. ७ omitted अजामितायै adds अजामितायै
XXX. 9. १५, १६ omitted as printed
XXX. 9. १६ omitted as printed
XXX. 9. २७, २८ omitted as printed
―――――
स्त्वा
कशंसं
क्तिः ।
न्त्यै ।
रया-
तेष्ठि-
APPENDIX V
CORRECTIONS IN THE KB TEXT ( 1968 )
) I. 1. २ °मूचुः
I. 1. f. n. 2 सतनूः
I. 5. ६ भवत्या पूर्वा°
III. 7. १२ प्रियतमे
VII. 12. २० मयोभुव
VIII. 12. १५ अनन्तर्हितो
X. 3. १८ सप्ता दशम्यो
त् X. 4. १५ एकस्थोऽभ्रातृव्यः
XI. 8. २३ श्रेषोऽन्वेतोः
XII. 2. १४ यदास्वैषी°
XII. 5. १६ वानुदिते
XIII. 5. ७ युक्ता
XIII. 6. ३ अथेळा°
XVIII. 9. २ वपारूपं
XIX. 2. १३ महाव्रती°
XIX. 3. ८ पशुपुरोळाश°
XXV. 13. १८ वत्सच्छवीं
XXVI. 5. १३ °मसमव्वलताया
XXVI. 5. १५ योन्यवादं
XXVI. 12. f. n. 2–2 ऐतोव ( omits वा )
XXX. 5. १८ दिशांकॢप्ती°