कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
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Udaya
XXV. 12. ४-६ omitted तत्राग्निमारुते रौद्रीं शस्त्वा
होतॄवयामरुतं पङ्क्तिशंसं
शंसति। पञ्चपदा पङ्क्तिः।
पाङ्क्तो वै यज्ञो यज्ञस्यैवाप्त्यै।
नेदच्छावाकस्य शिल्पंमन्तरया-
मेति।
XXV. 13. २ omitted प्रतिष्ठा वा अग्निष्टोमः प्रतिष्ठि-
त्या एव।
XXV. 13. ५ विश्वजिता विश्वजितो
XXV. 13. १८ वत्सच्छवीं वत्सच्छवीन्
XXVI. 5. १५ not clear सैवासीदिति
XXVI. 7, 8 अभ्यारभ्य (in all places) अभ्यारब्ध (in all places)
XXVI. 7. ७ अभ्यारभ्य वसन्ति अभ्यारब्धवन्ति स्युः
XXVI. 11. ४ अत्र न्वापि अत्र न्वा अपि
XXVII. 2. १३ नानुष्टुबायतनं रिच्यात् नानुष्टुभ आयतनं रिञ्च्यात्
XXVII. 5. ६, १० यदा, तदा यथा, तथा
XXVII. 5. १३ as printed omitted
XXVII. 9. २० सासावेव सोऽसावेव
XXVIII. 4. १ अङ्गिरोभ्यस्तूपहवम्
XXVIII. 5. २५ as printed इति omitted
XXIX. 1. २६ अधीयाय अपीयाय
XXIX. 5. १५ शिल्पतृचानि तृचानि
XXX. 4. २ as printed जातं omitted
XXX. 5. १४ अभिवदन्ति अभिवदन्तः
XXX. 9. ७ omitted अजामितायै adds अजामितायै
XXX. 9. १५, १६ omitted as printed
XXX. 9. १६ omitted as printed
XXX. 9. २७, २८ omitted as printed
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