सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

7. नाम दान का दिन

नाम दान का दिन

जब आप नाम-दान लेने आ रहे हो तो एक बात जान लेना कि आज आपका नया जन्म होने जा रहा है । आज तक जीवन में जो कुछ भी छल- कपट किया, पाप-कर्म किये, भूल जाओ, क्योंकि तब अज्ञान में थे, पाप-पुण्य का इतना बोध नहीं था। वैसे पाप होना नहीं चाहिए, पर पूर्व संस्कारों से बुद्धि न हुई और इस कारण पाप हुए। खैर, अब आप अज्ञानी नहीं रहेंगे। पाप- पुण्य का बोध आपको हो जाएगा, इसलिए अब कुछ ग़लत नहीं करना । सात नियम आपको बताए जायेंगे, जिनपर आपको दृढ़ता से चलना होगा। चिंता मत करें, आपको नाम की ताक़त का सहयोग मिलेगा। कहीं गफलत में होंगे तो वो ताक़त आपको रोकेगी, समझायेगी, पर उसके अनदेखा नहीं करना । यदि उसे अनसुना करके जानबूझकर ग़लत किया तो माफी नहीं मिलेगी। सज़ा साथ- साथ मिलेगी। सत्य बोलना, माँस न खाना, नशा न करना, चरित्रवान रहना, हक की कमाई खाना, जुआ नहीं खेलना और चोरी नहीं करना । तो आपको पहले ये नियम बताए जायेंगे । आप एक विश्वास के साथ नाम लेने आ रहे हैं तो और जगहों पर आपका विश्वास नहीं होना चाहिए, क्योंकि जिसकी सभी में आस्था है, समझो कि उसकी किसी में आस्था नहीं है, इसलिए वो नास्तिक है। आप आस्तिक होकर आएँ। पूरे विश्वास के साथ आएँ। इसलिए यदि आपने कोई डोरे, ताबीज, ग्रहों वाली अँगूठियाँ आदि पहन रखी हैं तो वो सब उतार आएँ, एक पूरे विश्वास के साथ समर्पित भाव से आएँ। ‘एक नाम को जानकर दूजा देई बहाय ।।' समझ लें कि आप सही जगह जा रहे हैं। मैंने बार-बार कहा है कि जो वस्तु मेरे पास है, ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है। इस बात को दिमाग़ जल्दी नहीं मानता है । आप विश्वास रखें। ऐसे ही सब कुछ नहीं कहा। पर मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं ही साहिब हूँ, मैं ही सब

कुछ कर रहा हूँ। मैंने तो साहिब के लिए कहा। अपना नाम लेना ही नहीं है । पता है, दुनिया डर रही है। खैर, अभी तो साहिब पर्दा करके चल रहा है । जिस दिन पर्दा हट जायेगा, सब साहिब में लय हो जायेंगे । लय हो जायेंगे सब। आपको ऐसे ही सब कुछ छोड़कर आने को नहीं कहा है। इसके पीछे कोई रहस्य है। तो फिर नाम-दान के समय आपसे एक चीज़ माँगूगा — विश्वास । विश्वास है क्या? आप कहेंगे- हाँ, है । इसी विश्वास के बदले आपको नाम दूँगा। याद रहे, इसी विश्वास के बल पर आपको पार करना है । इसलिए सही में करना विश्वास । विश्वास क्या-

गुरु को अखंड ब्रह्म कर माने । गुरु को नहीं मानुष कर जाने ।।

फिर मैंने आपसे आपका तन, मन, धन - तीनों लेने हैं; कहूँगा कि सच्चे दिल से आँख बंद करके दो । पता है, ये क्यों लूँगा ! क्योंकि ये तीनों ही आत्मा पर बीमारी है। आत्मा भूल से इन्हें मेरा-मेरा कह रही है । इसलिए—

तन मन दिया तो भल किया, सिर का जासी भार ।

जो कछु कहे सो मैं दिया, बहुत सहे शिर मार ।।

बस, आप आँख बंद करके सच्चे दिल से दे देंगे। यदि सच्चे दिल से नहीं देंगे तो समझ लेना कि मैं भी सच में नहीं लूँगा। तो जब आप अपना तन, मन, धन–तीनों मुझे सौंप देंगे तो फिर बाद में मैं आपका तन आपको वापिस कर दूँगा, कहूँगा—जाओ ! घर में माता-पिता होंगे, बाल-बच्चे होंगे, उनकी सेवा करना, पर आज से इसे मेरा मानकर कोई भी ग़लत काम नहीं करना । आप तो मुझे सौंप चुके होंगे, पर मैं आपको वापिस कर दूँगा। फिर इस तरह धन भी आपको वापिस कर दूँगा, कहूँगा कि इससे कोई ग़लत काम नहीं करना, किसी पर झूठा मुकद्दमा भी नहीं करना। फिर आपका मन मैं आपको वापिस नहीं करूँगा, कहूँगा कि इसे मेरे पास ही रखना । इसके बाद फिर आपको शीश पर अपना हाथ रखकर एक-एक करके कान में मंत्र दूँगा और आपकी आत्मा को उस एक पल में मन से अलग करके आज्ञा चक्र पर एकाग्र कर दूँगा । आपकी आत्मा को अपने में समाहित करके फिर छोड़ दूँगा। इससे जो गुरु - अंश आपके साथ टच हो जायेगा, वो कभी समाप्त नहीं होने वाला । नाम रूप में साहिब खुद साथ खड़ा हो जायेगा ।

नाम पाय सत्य जो बीरा । संग रहूँ मैं दास कबीरा।।

बस, यहाँ पर अपना नया जन्म समझना। फिर आपको खोलकर नाम और मंत्र - दोनों समझा दिये जायेंगे । ध्यान में बिठाकर अभ्यास भी करवा दिया जायेगा। नाम लेने के बाद आप सुबह - शाम नाम - भजन में बैठना। वैसे तो खाते-पीते, सोते-जागते हर समय लगे रहना । पर बैठते समय पहले 4-5 मिनट गुरु-मंत्र करना यानी आपने गुरु को याद करने बुला लिया। अब जो नाम बताया गया, उसका स्वाँसों में सुमिरन करते हुए शीश से सवा हाथ ऊपर ध्यान को एकाग्र करके जैसे बताया, वैसा करना । इस भ्रम में नहीं पड़ना कि यह नाम तो जपने में आ रहा है। जैसे तार पर बिजली चलती है, ऐसे ही इसके द्वारा आध्यात्मिक किरणें आपके अंदर आयेंगी। जो नाम आपको दिया, वो कहने- सुनने में आने वाला नहीं है। वो आपके साथ है । 'सार नाम सत्पुरुष कहाया।।' वो खुद परम- पुरुष है, जिसे प्रकट कर दिया। तो इस भ्रम में न पड़कर नाम का सुमिरन करना, क्योंकि इसी से ध्यान एकाग्र होगा। वैसे कभी भी बैठ सकते हो और सच पूछो तो आधी रात का समय बड़ा सुंदर है, क्योंकि उस समय मैं मिल भी जाऊँगा । 'देखा देखी सब कहें, भोर भये गुरु नाम । अर्धरात को जागसी, खानाजाद गुलाम ।।' छ: महीने तक गुरु पूरा-पूरा आपके साथ होगा। इस बीच यदि उसे पा लिया तो पा लिया अन्यथा बाद में थोड़ी मुश्किल होगी। इसलिए जमकर ध्यान करना - पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ। यदि नाम या मंत्र भूल जाओ तो किसी भी नामी से पूछ सकते हो। पर याद रहे, अपनी पत्नी से नहीं । यदि उससे पूछा तो फिर भाई-बहन का रिश्ता हो जायेगा। किसी दूसरे गैरनामी के सामने नाम (शब्द) को प्रकट नहीं करना अन्यथा बुरी हालत हो जायेगी । नामी से आप कुछ भी समझ सकते हैं। यदि आन्तरिक दुनिया में कोई रुकावट आए तो उसके लिए मैं हर समय उपलब्ध हूँ, पूछ सकते हो।