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सर्वकोश
करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

Karanakutuhalam of Bhaskaracharya with Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (टीकाकार: पं. रामचन्द्र पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished155 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 155 में से

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पृष्ठ 53

िकत्वे-(withकandत्). In line 20: भि न्न दि क्त्वा द न्त रं- the conjunctक्त्वाhasक+त+व, which often looks like क्त्वorस्त्यin old font. It isभिन्नदिक्त्वादन्तरं`.

Line 21:
६।१।२४ अक्षांशाधिकत्वाद्दक्षिणाः ॥ १६ ॥ इति करण-
Wait, does it say अक्षांशाधिकत्वाद्दक्षिणाः or अक्षांशाधिकत्वादाक्षिणाः?
अक्षांशाधिकत्वाद्दक्षिणाः (or दाक्षिणाः? Look at the letter: दा or द? It has an ā-mātrā? No, दाक्षिणाः? Actually it looks like दाक्षिणाः, wait, line 6 has दक्षिणाः, line 14 has दक्षिणा, line 19 has दक्षिणा. In line 21: अक्षांशाधिकत्वाद्दाक्षिणाः or अक्षांशाधिकत्वाद्दक्षिणाः? It looks like दाक्षिणाः with ā-mātrā).
Wait, look at end of line 21:
॥ १६ ॥ इति करण-
Wait, look at करण:
Is it करण? The