कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४६ ) बीजक कबीरदास ।
अथ छठी रमैनी ।
चौपाई ।
वर्णहुं कौनरूप औ रेखा । दूसर कौन आय जो देखा १
औ ओंकार आदिनहिंवेदा । ताकर कहौं कौन कुलभेदा २
नहिंतारागणनहिंरविचंदा । नहिंकछुहोत पिताके बिंदा ३
नहिंजलनहिंथलनहिंथिरपवना।कोधरैनामहुकुमकोवरना४
नहिंकछुहोतदिवसअरुराती । ताकरकहहुकौनकुलजाती५
साखी ॥ शून्यसहज मनस्मृतिते, प्रकटभई यकज्योति ॥
बलिहारी तापुरुष छवि, निरालंब जो होति ६॥
वर्णहुंकौनरूपऔरेखा । दूसरकौन आय जो देखा १
औ ओंकार आदि नहींवेदा । ताकरकहौं कौनकुलभेदा २
वह जो अनिर्वचनीयहै ताको कौनरूप रेखावर्णनकरों मैंहीं नहीं वर्णन करि
सकौं हौं तौ दूसर कौन आयजोदेख्यो ॥ १ ॥ प्रणवको वेदहू नहीं जानेहैं
काहेते कि प्रणव एकाक्षरब्रह्मवेदनको आदि है सो तौ प्रणवहू नहीं रह्यो
ताहूको आदि है उसको कौन कुल भेद कहौं ॥ २ ॥
नहिंतारागणनहिंरविचंदा । नहिंकछुहोतपिताकेबिंदा ३
नहिंजलनहिंथलनहिंथिरपवना।कोधरैनामहुकुमकोवरना४
नहिंकछुहोतदिवसअरुराती । ताकरकहहुंकौनकुलजाती५
न तारागण न सूर्य्य न चंद्रमा न पिताको बिंदु एकौ नहीं रहे जाते सब
उत्पत्तिहै ॥३॥ पृथ्वी अप् तेज, वायु आकाश ये एकौ नहीं रहे तहां कौन नाम
धरतभये औ काको हुकुम वर्णन करत भये ॥ ४ ॥ औ तहां न दिवस होत
भयो न रात्रि होत भई ताकी कौन कुलजाति कहौं ॥ ५ ॥