कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४० ) बीजक कबीरदास ।
अथ चौथीरमैनी ।
चौपाई ।
प्रथम चरणगुरूकीन बिचारा । करतागावै सिरजनहारा॥१॥
कर्म करिकै जग बौराया।शक्ति भक्तिलै बांधिनिमाया॥२॥
अद्भुत रूप जातिकी वानी।उपजी प्रीति रमैनी ठानी ॥३॥
गुणिअनगुणी अर्थनहिं आया। बहुतकजने चीन्हि नहिं पाया ४
जो चीन्है तेहि निर्मल अंगा।अनचीन्हे नल भयेपतंगा॥५॥
साखी ॥ चीन्हि चीन्हि कह गावहू, बानी परी न चीन्हि॥
आदि अंत उत्पति प्रलय, सब आपुहिकहि दीन्हि॥६॥
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प्रथमचरणगुरूकीनविचारा । करतागावैसिरजनहारा ॥१॥
कर्म करिकैजगबौराया । शक्तिभक्तिलैबांधिनिमाया॥२॥
प्रथमचरणकहे जगत्की आदिमें गुरुकहे साहब बिचारकीन कहेसुरति
दीन कि हमको जानै,हम हंसरूपदै अपनेधामकोलै आवैं।सो जीवनेह ते वा चैतन्यता
पाय जगत्मुख है जगत्उत्पन्नकरिकै संसारीह्वैगये सो करता तो साहबहैं जिनकी चैत-
न्यता पायजीव समष्टिते व्यष्टिभये तौनेसाहबकी करतब्यता तो न जान्यो ब्रह्मादिक
नहीको सिरजनहार मानतभये ॥ १ ॥ तेईब्रह्मादिक नानाकर्मनको प्रतिपादन
करिकै जगत् बौरायदियो औशक्ति जो है गायत्री तौने के उपदेशकी विधिकैकै
ताकी भक्ति आपकैकै औजीवनको कराय कै माया में बांधदियो ॥ २ ॥
अद्भुत रूप जातिकीवानी । उपजीप्रीतिरमैनीठानी ॥ ३ ॥
गुणिअनगुणीअर्थनहिंआया।बहुतकजनेचीन्हिनहिंपाया४
अद्भुत रूप औ नाना जातिकी जोहै कर्म प्रतिपादक ब्रह्मादिकनकी बाणी
अर्थात् अद्भुतरूपनके हैं ध्यान जिनमें कहेकाहूके बहुत मूड़ काहूके बहुत हाथ